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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 / Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

BNSS Section 100 — Search for persons wrongfully confined

हिंदी पाठ

यदि किसी जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट को यह विश्वास करने का कारण है कि कोई व्यक्ति ऐसी परिस्थितियों में परिरुदूध है, जिनमें वह परिरोध अपराध की कोटि में आता है, तो वह तलाशी-वारंट जारी कर सकेगा और वह व्यक्ति, जिसको ऐसा वारंट निदेशित किया जाता है, ऐसे परिरुदूध व्यक्ति के लिए तलाशी ले सकेगा, और ऐसी तलाशी तदनुसार ही ली जाएगी और यदि वह व्यक्ति मिल जाए, तो उसे तुरंत मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाया जाएगा, जो ऐसा आदेश करेगा जैसा उस मामले की परिस्थितियों में उचित प्रतीत हो ।
40. किसी महिला या किसी बालिका के किसी विधिविरुद्ध प्रयोजन के लिए अपहत किए जाने या विधिविरुद्ध निरुद्ध रखे जाने का शपथ पर परिवाद किए जाने की दशा में जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट यह आदेश कर सकेगा कि उस महिला को तुरंत स्वतंत्र किया जाए या वह बालिका उसके माता-पिता, संरक्षक या अन्य व्यक्ति को, जो उस बालिका का विधिपूर्ण भारसाधक है, तुरंत वापस कर दी जाए और ऐसे आदेश का अनुपालन ऐसे बल के प्रयोग द्वारा, जैसा आवश्यक हो, करा सकता है ।

Official text

If any District Magistrate, Sub-divisional Magistrate or Magistrate of the first class has reason to believe that any person is confined under such circumstances that the confinement amounts to an offence, he may issue a search-warrant, and the person to whom such warrant is directed may search for the person so confined; and such search shall be made in accordance therewith, and the person, if found, shall be immediately taken before a Magistrate, who shall make such order as in the circumstances of the case seems proper.