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भारत का संविधान / Constitution of India

COI Article 88 — Rights of Ministers and Attorney-General as respects Houses

अनुच्छेद 88 — सदनों के बारे में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार

हिंदी पाठ

प्रत्येक मंत्री और भारत के महान्यायवादी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी सदन में, सदनों की किसी संयुक्त बैठक में और संसद्‌ की किसी समिति में, जिसमें उसका नाम सदस्य के रूप में दिया गया है, बोले और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग ले, किन्तु इस अनुच्छेद के आधार पर वह मत देने का हकदार नहीं होगा ।
. संविधान (पहला संशोधन) अधिनियम, 95 की धारा 6 द्वारा (8-6-95 से) “अनुच्छेद 85” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
2. संविधान (पहला संशोधन) अधिनियम, 95। की धारा 7 द्वारा (8-6-495। से) “प्रत्येक सत्र” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
3. संविधान (पहला संशोधन) अधिनियम, 95। की धारा 7 द्वारा (8-6-95 से) “और सदन के अन्य कार्य पर इस चर्चा को अग्रता देने के लिए” शब्दों का लोप किया गया ।
भारत का संविधान 4 (भाग 5--संघ) संसद के अधिकारी

Official text

Every Minister and the Attorney-General of India shall have the right to speak in, and otherwise to take part in the proceedings of, either House, any joint sitting of the Houses, and any committee of Parliament of which he may be named a member, but shall not by virtue of this article be entitled to vote. (w.e.f. 18-6-1951). (w.e.f. 18-6-1951). omitted by s. 7, ibid. (w.e.f. 18-6-1951). THE CONSTITUTION OF INDIA (Part V.—The Union) Officers of Parliament