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सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 / Code of Civil Procedure, 1908

CPC Section 22 — Power to transfer suits which may be instituted in more than one Court

धारा 22 — जो वाद एक से अधिक न्यायालयों में संस्थित किए जा सकते हैं उनको अन्तरित करने की शक्ति

हिंदी पाठ

जहां कोई वाद दो या अधिक न्यायालयों में से किसी एक में संस्थित किया जा सकता है और ऐसे न्यायालयों में से किसी एक में संस्थित किया गया है वहां कोई भी प्रतिवादी अन्य पक्षकारों को सूचना देने के पश्चत्‌ यथासंभव सर्वप्रथम अवसर पर और उन सब मामलों में, जिनमें विवाद्यक स्थिर किए जाते हैं, ऐसे स्थिरीकरण के समय या उसके पहले किसी अन्य न्यायालय को वाद अन्तरित किए जाने के लिए आवेदन कर
! [976 के अधिनियम सं० 04 की धारा 7 द्वारा (-2-977 से) स्पष्टीकरण का लोप किया गया ।
2 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 7 द्वारा (-2-977 से) “स्पष्टीकरण 2” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
3 95 के अधिनियम सं० 2 की धारा 3 द्वारा “राज्यों” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
* [976 के अधिनियम सं० 04 की धारा 8 द्वारा (-2-977 से) धारा 2। उसकी उपधारा (1) के रूप में पुनःसंख्यांकित । 5 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 8 द्वारा (-2-977 से) अन्तःस्थापित ।
* 976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 9 द्वारा (-2-977 से) अन्तःस्थापित ।
सकेगा और वह न्यायालय, जिससे ऐसा आवेदन किया गया है, अन्य पक्षकारों के (यदि कोई हों) आश्षेपों पर विचार करने के पश्चात्‌ यह अवधारित करेगा कि अधिकारिता रखने वाले कई न्यायालयों में से किस न्यायालय में वाद चलेगा ।

Official text

Where a suit may be instituted in any one of two or more Courts and is instituted in one of such Courts, any defendant, after notice to the other parties, may, at the earliest possible opportunity and in all cases where issues are settled at or before such settlement, apply to have the suit transferred to another Court, and the Court to which such application is made, after considering the objections of the other parties (if any), shall determine in which of the several Courts having jurisdiction the suit shall proceed. 1. Explanation 1 omitted by Act 104 of 1976, s. 7 (w.e.f. 1-2-1977). 4. S. 21 renumbered as sub-section (1) by Act 104 of 1976, s. 8 (w.e.f. 1-2-1977).