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अधिगम के सिद्धांत
Theories of learning • Child Development & Pedagogy
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🎓 पूरा पाठ — कक्षा की तरह:
थॉर्नडाइक — प्रयास और त्रुटि: थॉर्नडाइक ने एक भूखी बिल्ली को पहेली-बक्से में बंद किया, बाहर मछली रखी। बिल्ली ने इधर-उधर पंजे मारे; संयोग से कुंडी खुल गई। अगली बार कम ग़लतियाँ, और अंत में तुरंत कुंडी खोलने लगी। निष्कर्ष — बार-बार प्रयास और ग़लतियों से सीखना। उनके तीन नियम: तत्परता (बच्चा तैयार हो तो जल्दी सीखता), अभ्यास (दोहराने से पक्का), प्रभाव (संतोष मिले तो व्यवहार दोहराया जाता)। कक्षा में: बच्चे को अभ्यास के अवसर और सफलता का आनंद दीजिए।
पावलॉव — शास्त्रीय अनुबंधन: पावलॉव ने देखा कि कुत्ते को भोजन दिखते ही लार आती है (स्वाभाविक)। उन्होंने भोजन से ठीक पहले घंटी बजाई; कुछ दिनों बाद केवल घंटी से ही लार आने लगी। यानी एक तटस्थ चीज़ (घंटी) स्वाभाविक उद्दीपक (भोजन) से जुड़ गई। कक्षा में: अगर गणित की कक्षा हमेशा डाँट से जुड़ी हो, तो बच्चे में गणित से ही डर का अनुबंधन हो जाता है — इसलिए कक्षा का माहौल सुखद रखें।
स्किनर — क्रियाप्रसूत अनुबंधन: स्किनर के बक्से में चूहा लीवर दबाता तो भोजन मिलता — धीरे-धीरे वह लीवर बार-बार दबाने लगा। यहाँ व्यवहार पहले, फिर उसका परिणाम (पुनर्बलन)। धनात्मक पुनर्बलन — अच्छा काम करने पर प्रशंसा या स्टार; ऋणात्मक पुनर्बलन — अच्छा काम करने पर कोई अप्रिय चीज़ हटा देना (जैसे "पूरा काम कर लिया तो आज होमवर्क नहीं") — ध्यान दें, यह दंड नहीं, यह भी व्यवहार बढ़ाता है। दंड व्यवहार को घटाता है, पर डर और नाराज़गी भी पैदा करता है।
कोहलर — अंतर्दृष्टि (सूझ): चिंपांज़ी सुल्तान के पिंजरे में ऊपर केले लटकाए गए और कुछ डिब्बे रखे। कुछ देर इधर-उधर देखने के बाद उसे अचानक सूझा — डिब्बे एक के ऊपर एक रखकर केले तोड़ लिए। यानी सीखना केवल प्रयास-त्रुटि नहीं, पूरी स्थिति को समझकर भी होता है (गेस्टाल्ट: "पूर्ण, अंशों के योग से अधिक है")। कक्षा में: पहले पूरा चित्र दिखाइए, फिर हिस्से।
बंडूरा — सामाजिक अधिगम: बंडूरा ने बच्चों को एक वीडियो दिखाया जिसमें एक बड़ा व्यक्ति बोबो गुड़िया को मार रहा था। बाद में खेलने पर उन बच्चों ने भी गुड़िया को वैसे ही मारा। यानी बच्चे देखकर (अवलोकन से) सीखते हैं। चार चरण: ध्यान → धारण → पुनरुत्पादन → अभिप्रेरणा। कक्षा में: शिक्षक स्वयं आदर्श है — जैसा व्यवहार करेंगे, बच्चे वैसा सीखेंगे।
सार: थॉर्नडाइक — प्रयास-त्रुटि (तत्परता, अभ्यास, प्रभाव); पावलॉव — घंटी-लार (जोड़); स्किनर — परिणाम से (पुनर्बलन); कोहलर — अचानक सूझ; बंडूरा — देखकर; ड्यूई — करके।
| प्रयास और त्रुटि | थॉर्नडाइक | भूखी बिल्ली, पहेली बक्सा; तत्परता, अभ्यास, प्रभाव के नियम |
|---|---|---|
| शास्त्रीय अनुबंधन | पावलॉव | कुत्ता, घंटी और लार |
| क्रियाप्रसूत अनुबंधन | स्किनर | चूहा/कबूतर — पुनर्बलन |
| अंतर्दृष्टि (सूझ) | कोहलर (गेस्टाल्ट) | चिंपांज़ी "सुल्तान" |
| सामाजिक अधिगम (अवलोकन) | बंडूरा | बोबो डॉल — देखकर सीखना |
| अनुभव से सीखना | जॉन ड्यूई | "करके सीखना" |
📖 समझिए — पुनर्बलन: धनात्मक — अच्छे व्यवहार पर कुछ अच्छा देना (प्रशंसा); ऋणात्मक — अच्छे व्यवहार पर कुछ अप्रिय हटाना (यह दंड नहीं है!)।
⚠️ परीक्षा का जाल: ऋणात्मक पुनर्बलन दंड नहीं है — यह व्यवहार को बढ़ाता है।
📝 ऐसे पूछा जाता है: "बच्चा बड़ों को देखकर बात करने का ढंग सीखता है — कौन-सा सिद्धांत?" → बंडूरा का सामाजिक अधिगम।
❓ प्रश्न-उत्तर (7)
1. प्रयास और त्रुटि सिद्धांत?
उत्तर: थॉर्नडाइक
Trial and error? — Thorndike
2. शास्त्रीय अनुबंधन?
उत्तर: पावलॉव
Classical conditioning? — Pavlov
3. क्रियाप्रसूत अनुबंधन?
उत्तर: स्किनर
Operant conditioning? — Skinner
4. अंतर्दृष्टि सिद्धांत?
उत्तर: कोहलर
Insight learning? — Köhler
5. बोबो डॉल प्रयोग?
उत्तर: बंडूरा
Bobo doll experiment? — Bandura
6. "करके सीखना"?
उत्तर: जॉन ड्यूई
"Learning by doing"? — John Dewey
7. ऋणात्मक पुनर्बलन व्यवहार को?
उत्तर: बढ़ाता है
Negative reinforcement? — Increases behaviour
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