SUMI SETU › Laws / कानून › BNS › Section 120
BNS Section 120 (IPC 330, 331) — Voluntarily causing hurt or grievous hurt to extort confession, or to compel restoration of property
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) धारा 120 (पुरानी आईपीसी 330, 331)
| Law / कानून | Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) |
|---|---|
| Section / धारा | 120 |
| Chapter / अध्याय | Chapter VI — Of Offences Affecting The Human Body |
| Old law / पुरानी धारा | Indian Penal Code (IPC) — IPC 330, IPC 331 |
संज्ञेय, ज़मानती और विचारण (BNSS प्रथम अनुसूची)
| उप-धारा / Clause | संज्ञेय? | ज़मानती? | विचारण / Triable by |
|---|---|---|---|
| 120(1) | संज्ञेय Cognizable | ज़मानती Bailable | प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट Magistrate of the first class |
| 120(2) | संज्ञेय Cognizable | अज़मानती Non-bailable | सत्र न्यायालय Court of Session |
स्रोत: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की प्रथम अनुसूची।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
BNS धारा 120 क्या है? / What is BNS Section 120?
Voluntarily causing hurt or grievous hurt to extort confession, or to compel restoration of property
क्या BNS धारा 120 ज़मानती है? / Is BNS Section 120 bailable?
यह अपराध: 120(1) — ज़मानती; 120(2) — अज़मानती
क्या BNS धारा 120 संज्ञेय है? / Is BNS Section 120 cognizable?
यह अपराध: संज्ञेय (Cognizable)
BNS धारा 120 का विचारण कौन-सा न्यायालय करता है? / Which court tries BNS Section 120?
विचारण: 120(1) — प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट; 120(2) — सत्र न्यायालय
बीएनएस धारा 120 पुरानी आईपीसी की कौन-सी धारा है? / Which old IPC section is BNS Section 120?
BNS Section 120 = IPC 330, 331. Voluntarily causing hurt or grievous hurt to extort confession, or to compel restoration of property
Full text (English)
Illustrations.
(a) A, a police officer, tortures Z in order to induce Z to confess that he committed a crime. A is guilty of an offence under this section.
(b) A, a police officer, tortures B to induce him to point out where certain stolen property is deposited. A is guilty of an offence under this section.
(c) A, a revenue officer, tortures Z in order to compel him to pay certain arrears of revenue due from Z. A is guilty of an offence under this section.
(2) Whoever voluntarily causes grievous hurt for any purpose referred to in sub-section (1), shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
पूरा पाठ (हिंदी)
(क) क, जो एक पुलिस अधिकारी है, य से यह संस्वीकृति कराने के लिए, कि उसने अपराध किया है उसे उत्प्रेरित करने के लिए यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(ख) क, जो एक पुलिस अधिकारी है, ख से यह पता लगाने के लिए कि अमुक चुराई हुई सम्पत्ति कहां रखी है, उत्प्रेरित करने के लिए उसे यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(ग) क, जो एक राजस्व अधिकारी है, राजस्व का वह बकाया, जो य द्वारा देय है, देने के लिए य को विवश करने के लिए उसे यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(2) जो कोई, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी प्रयोजन के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक हो सकेगी दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
2. (1) जो कोई, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो लोक सेवक है, उस समय जब वह वैसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा है या इस आशय से कि उस व्यक्ति को या किसी अन्य लोक सेवक को, वैसे लोक सेवक के नाते उसके अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन से निवारित या भयोपरत करे या वैसे लोक सेवक के नाते उस व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में की गई या किए जाने के लिए प्रयत्न किए गए किसी बात के परिणामस्वरूप स्वेच्छया उपहति कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
(2) जो कोई, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो लोक सेवक है, उस समय जब वह वैसे लोक सेवक के नाते अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा है या इस आशय से कि उस व्यक्ति को, या किसी अन्य लोक सेवक को वैसे लोक सेवक के नाते उसके अपने कर्तव्य के निर्वहन से निवारित या भयोपरत करे या वैसे लोक सेवक के नाते उस व्यक्ति द्वारा अपने कर्तव्य के विधिपूर्ण निर्वहन में की गई या किए जाने के लिए प्रयतित किसी बात के परिणामस्वरूप स्वेच्छया घोर उपहति कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
Source: India Code — The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (As on 6 Oct 2025). All BNS sections
📤 WhatsApp पर भेजें✈️ Telegram
SUMI SETU • All Indian laws / सभी कानून • वकील सहायक / Lawyer Assistant