SUMI SETU › Laws / कानून › BNS › Section 125
BNS Section 125 (IPC 336, 337, 338) — Act endangering life or personal safety of others
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) धारा 125 (पुरानी आईपीसी 336, 337, 338) — जीवन या सुरक्षा को संकट में डालने वाला कार्य
| Law / कानून | Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) |
|---|---|
| Section / धारा | 125 |
| Chapter / अध्याय | Chapter VI — Of Offences Affecting The Human Body |
| Old law / पुरानी धारा | Indian Penal Code (IPC) — IPC 336, IPC 337, IPC 338 |
| Punishment / सज़ा | मूल अपराध में 3 माह तक कारावास या ₹2,500 तक जुर्माना या दोनों |
सरल हिंदी सार
इतनी उतावली या लापरवाही से कोई कार्य करना कि दूसरों का जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा ख़तरे में पड़े। चोट पहुँचे तो दंड बढ़ता है, और घोर उपहति होने पर और बढ़ जाता है।
संज्ञेय, ज़मानती और विचारण (BNSS प्रथम अनुसूची)
| उप-धारा / Clause | संज्ञेय? | ज़मानती? | विचारण / Triable by |
|---|---|---|---|
| 125 | संज्ञेय Cognizable | ज़मानती Bailable | कोई भी मजिस्ट्रेट Any Magistrate |
स्रोत: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की प्रथम अनुसूची।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
BNS धारा 125 क्या है? / What is BNS Section 125?
Act endangering life or personal safety of others — जीवन या सुरक्षा को संकट में डालने वाला कार्य: इतनी उतावली या लापरवाही से कोई कार्य करना कि दूसरों का जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा ख़तरे में पड़े। चोट पहुँचे तो दंड बढ़ता है, और घोर उपहति होने पर और बढ़ जाता है।
क्या BNS धारा 125 ज़मानती है? / Is BNS Section 125 bailable?
यह अपराध: ज़मानती (Bailable)
क्या BNS धारा 125 संज्ञेय है? / Is BNS Section 125 cognizable?
यह अपराध: संज्ञेय (Cognizable)
BNS धारा 125 का विचारण कौन-सा न्यायालय करता है? / Which court tries BNS Section 125?
विचारण: कोई भी मजिस्ट्रेट (Any Magistrate)
BNS धारा 125 की सज़ा क्या है? / What is the punishment under BNS Section 125?
मूल अपराध में 3 माह तक कारावास या ₹2,500 तक जुर्माना या दोनों
बीएनएस धारा 125 पुरानी आईपीसी की कौन-सी धारा है? / Which old IPC section is BNS Section 125?
BNS Section 125 = IPC 336, 337, 338. Act endangering life or personal safety of others
Full text (English)
(a) where hurt is caused, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to five thousand rupees, or with both;
(b) where grievous hurt is caused, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years, or with fine which may extend to ten thousand rupees, or with both. Of wrongful restraint and wrongful confinement
पूरा पाठ (हिंदी)
(क) जहां उपहति कारित की जाती है, वहां दोनों में से किसी भांति के कारावास, जिसकी अवधि छह मास तक हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच हजार रूपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ;
(ख) जहां घोर उपहति कारित की जाती है, वहां दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक हो सकेगी या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक हो सकेगा या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
सदोष अवरोध और सदोष परिरोध के विषय में
Source: India Code — The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (As on 6 Oct 2025). All BNS sections
📤 WhatsApp पर भेजें✈️ Telegram
SUMI SETU • All Indian laws / सभी कानून • वकील सहायक / Lawyer Assistant