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BNSS Section 170 — Arrest to prevent commission of cognizable offences
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) धारा 170 — संज्ञेय अपराध रोकने के लिए गिरफ़्तारी
| Law / कानून | Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) |
|---|---|
| Section / धारा | 170 |
| Chapter / अध्याय | Chapter XII — Preventive Action Of The Police |
सरल हिंदी सार
संज्ञेय अपराध रोकने के लिए गिरफ़्तारी
संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तारी कर सकती है, पर गिरफ़्तार व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता जब तक कोई और क़ानूनी कारण न हो।
संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तारी कर सकती है, पर गिरफ़्तार व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता जब तक कोई और क़ानूनी कारण न हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बीएनएसएस धारा 170 क्या है? / What is BNSS Section 170?
Arrest to prevent commission of cognizable offences — संज्ञेय अपराध रोकने के लिए गिरफ़्तारी: संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तारी कर सकती है, पर गिरफ़्तार व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता जब तक कोई और क़ानूनी कारण न हो।
Full text (English)
(1) A police officer knowing of a design to commit any cognizable offence may arrest, without orders from a Magistrate and without a warrant, the person so designing, if it appears to such officer that the commission of the offence cannot be otherwise prevented.
(2) No person arrested under sub-section (1) shall be detained in custody for a period exceeding twenty-four hours from the time of his arrest unless his further detention is required or authorised under any other provisions of this Sanhita or of any other law for the time being in force.
(2) No person arrested under sub-section (1) shall be detained in custody for a period exceeding twenty-four hours from the time of his arrest unless his further detention is required or authorised under any other provisions of this Sanhita or of any other law for the time being in force.
पूरा पाठ (हिंदी)
(1) कोई पुलिस अधिकारी, जिसे कोई संज्ञेय अपराध करने की परिकल्पना का पता है, ऐसी परिकल्पना करने वाले व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के आदेशों के बिना और वारंट के बिना उस दशा में गिरफ्तार कर सकता है जिसमें ऐसे अधिकारी को प्रतीत होता है कि उस अपराध का किया जाना अन्यथा नहीं रोका जा सकता ।
(2) उपधारा (1) के अधीन गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के समय से चौबीस घंटे की अवधि से अधिक के लिए अभिरक्षा में उस दशा के सिवाय निरुद्ध नहीं रखा जाएगा जिसमें उसका और आगे निरुद्ध रखा जाना इस संहिता के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के किन्हीं अन्य उपबंधों के अधीन अपेक्षित या प्राधिकृत है ।
7. किसी पुलिस अधिकारी की इष्टिगोचरता में किसी भी चल या अचल सार्वजनिक संपत्ति को हानि पहुंचाने का प्रयत्न किए जाने पर वह उसका, या किसी सार्वजनिक भूमि-चिहन या बोया या नौपरिवहन के लिए प्रयुक्त अन्य चिहन के हटाए जाने
या उसे हानि पहुंचाए जाने का, निवारण करने के लिए अपने ही प्राधिकार से हस्तक्षेप कर सकता है ।
🔎 सरल सार, केस-लॉ और बोलकर/फ़ोटो से धारा खोजें(2) उपधारा (1) के अधीन गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के समय से चौबीस घंटे की अवधि से अधिक के लिए अभिरक्षा में उस दशा के सिवाय निरुद्ध नहीं रखा जाएगा जिसमें उसका और आगे निरुद्ध रखा जाना इस संहिता के या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के किन्हीं अन्य उपबंधों के अधीन अपेक्षित या प्राधिकृत है ।
7. किसी पुलिस अधिकारी की इष्टिगोचरता में किसी भी चल या अचल सार्वजनिक संपत्ति को हानि पहुंचाने का प्रयत्न किए जाने पर वह उसका, या किसी सार्वजनिक भूमि-चिहन या बोया या नौपरिवहन के लिए प्रयुक्त अन्य चिहन के हटाए जाने
या उसे हानि पहुंचाए जाने का, निवारण करने के लिए अपने ही प्राधिकार से हस्तक्षेप कर सकता है ।
Source: India Code — The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023. All BNSS sections
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