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BNSS Section 255 (CrPC 232) — Acquittal
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) धारा 255 (पुरानी सीआरपीसी 232) — दोषमुक्ति
| Law / कानून | Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) |
|---|---|
| Section / धारा | 255 |
| Chapter / अध्याय | Chapter XIX — Trial Before A Court Of Session |
| Old law / पुरानी धारा | Code of Criminal Procedure (CrPC) — CrPC 232 |
सरल हिंदी सार
दोषमुक्ति
अभियोजन साक्ष्य और अभियुक्त की परीक्षा के बाद यदि न्यायाधीश को लगे कि अभियुक्त ने अपराध किया ही नहीं, तो वह दोषमुक्ति का आदेश देता है।
अभियोजन साक्ष्य और अभियुक्त की परीक्षा के बाद यदि न्यायाधीश को लगे कि अभियुक्त ने अपराध किया ही नहीं, तो वह दोषमुक्ति का आदेश देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बीएनएसएस धारा 255 क्या है? / What is BNSS Section 255?
Acquittal — दोषमुक्ति: अभियोजन साक्ष्य और अभियुक्त की परीक्षा के बाद यदि न्यायाधीश को लगे कि अभियुक्त ने अपराध किया ही नहीं, तो वह दोषमुक्ति का आदेश देता है।
बीएनएसएस धारा 255 पुरानी सीआरपीसी की कौन-सी धारा है? / Which old CrPC section is BNSS Section 255?
BNSS Section 255 = CrPC 232. Acquittal
Full text (English)
If, after taking the evidence for the prosecution, examining the accused and hearing the prosecution and the defence on the point, the Judge considers that there is no evidence that the accused committed the offence, the Judge shall record an order of acquittal.
पूरा पाठ (हिंदी)
यदि सम्बदूध विषय के बारे में अभियोजन का साक्ष्य लेने, अभियुक्त की परीक्षा करने और अभियोजन और प्रतिरक्षा को सुनने के पश्चात् न्यायाधीश का यह विचार है कि इस बात का साक्ष्य नहीं है कि अभियुक्त ने अपराध किया है तो न्यायाधीश दोषमुक्ति का आदेश अभिलिखित करेगा ।
🔎 सरल सार, केस-लॉ और बोलकर/फ़ोटो से धारा खोजेंSource: India Code — The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023. All BNSS sections
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