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BNSS Section 303 (CrPC 268) — Power of State Government or Central Government to exclude certain persons from operation of section 302
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) धारा 303 (पुरानी सीआरपीसी 268)
| Law / कानून | Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) |
|---|---|
| Section / धारा | 303 |
| Chapter / अध्याय | Chapter XXIV — Attendance Of Persons Confined Or Detained In Prisons |
| Old law / पुरानी धारा | Code of Criminal Procedure (CrPC) — CrPC 268 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बीएनएसएस धारा 303 क्या है? / What is BNSS Section 303?
Power of State Government or Central Government to exclude certain persons from operation of section 302
बीएनएसएस धारा 303 पुरानी सीआरपीसी की कौन-सी धारा है? / Which old CrPC section is BNSS Section 303?
BNSS Section 303 = CrPC 268. Power of State Government or Central Government to exclude certain persons from operation of section 302
Full text (English)
(1) The State Government or the Central Government, as the case may be, may, at any time, having regard to the matters specified in sub-section (2), by general or special order, direct that any person or class of persons shall not be removed from the prison in which he or they may be confined or detained, and thereupon, so long as the order remains in force, no order made under section 302, whether before or after the order of the State Government or the Central Government, shall have effect in respect of such person or class of persons.
(2) Before making an order under sub-section (1), the State Government or the Central Government in the cases instituted by its central agency, as the case may be, shall have regard to the following matters, namely:—
(a) the nature of the offence for which, or the grounds on which, the person or class of persons has been ordered to be confined or detained in prison;
(b) the likelihood of the disturbance of public order if the person or class of persons is allowed to be removed from the prison;
(c) the public interest, generally.
(2) Before making an order under sub-section (1), the State Government or the Central Government in the cases instituted by its central agency, as the case may be, shall have regard to the following matters, namely:—
(a) the nature of the offence for which, or the grounds on which, the person or class of persons has been ordered to be confined or detained in prison;
(b) the likelihood of the disturbance of public order if the person or class of persons is allowed to be removed from the prison;
(c) the public interest, generally.
पूरा पाठ (हिंदी)
(1) राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट बातों को ध्यान में रखते हुए, किसी समय, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, यह निदेश दे सकती है कि किसी व्यक्ति को या किसी वर्ग के व्यक्तियों को उस कारागार से नहीं हटाया जाएगा जिसमें उसे या उन्हें परिरुदूध या निरुद्ध किया गया है, और तब, जब तक ऐसा आदेश प्रवृत्त रहे, धारा 302 के अधीन दिया गया कोई आदेश, चाहे वह राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार के आदेश के पूर्व किया गया हो या उसके पश्चात्, ऐसे व्यक्ति या ऐसे वर्ग के व्यक्तियों के बारे में प्रभावी नहीं होगा
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश देने के पूर्व, यथास्थिति, राज्य सरकार या जब मामला उसके केन्द्रीय अभिकरण द्वारा संस्थित है, तो केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेगी, अर्थात् :--
(क) उस अपराध का स्वरूप जिसके लिए, या वे आधार, जिन पर, उस व्यक्ति को या उस वर्ग के व्यक्तियों को कारागार में परिरुदूध या निरुद्ध करने का आदेश दिया गया है ;
(ख) यदि उस व्यक्ति को या उस वर्ग के व्यक्तियों को कारागार से हटाने की अनुज्ञा दी जाए तो लोक-व्यवस्था में विघ्न की संभाव्यता ;
भारत का राजपत्र असाधारण 304. जहां वह व्यक्ति, जिसके बारे में धारा 302 के अधीन कोई आदेश दिया गया
(क) बीमारी या अंगशैथिल्य के कारण कारागार से हटाए जाने के योग्य नहीं है; या
(ख) विचारण के लिए सुपुर्दगी के अधीन है या विचारण के लंबित रहने तक के लिए या प्रारंभिक अन्वेषण तक के लिए प्रतिप्रेषणाधीन है ; या
(ग) इतनी अवधि के लिए अभिरक्षा में है जितनी आदेश का अनुपालन करने के लिए और उस कारागार में जिसमें वह परिरुदूध या निरुद्ध है, उसे वापस ले आने के लिए अपेक्षित समय के समाप्त होने के पूर्व समाप्त होती है ; या
(घ) ऐसा व्यक्ति है जिसे धारा 303 के अधीन राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा दिया गया कोई आदेश लागू होता है,
वहां कारागार का भारसाधक अधिकारी न्यायालय के आदेश को कार्यान्वित नहीं करेगा और ऐसा न करने के कारणों का विवरण न्यायालय को भेजेगा :
परन्तु जहां ऐसे व्यक्ति से किसी ऐसे स्थान पर, जो कारागार से पच्चीस किलोमीटर से अधिक दूर नहीं है, साक्ष्य देने के लिए उपस्थित होने की अपेक्षा की जाती है, वहां कारागार के भारसाधक अधिकारी के ऐसा न करने का कारण खंड (ख) में वर्णित कारण नहीं होगा ।
🔎 सरल सार, केस-लॉ और बोलकर/फ़ोटो से धारा खोजें(2) उपधारा (1) के अधीन कोई आदेश देने के पूर्व, यथास्थिति, राज्य सरकार या जब मामला उसके केन्द्रीय अभिकरण द्वारा संस्थित है, तो केन्द्रीय सरकार निम्नलिखित बातों का ध्यान रखेगी, अर्थात् :--
(क) उस अपराध का स्वरूप जिसके लिए, या वे आधार, जिन पर, उस व्यक्ति को या उस वर्ग के व्यक्तियों को कारागार में परिरुदूध या निरुद्ध करने का आदेश दिया गया है ;
(ख) यदि उस व्यक्ति को या उस वर्ग के व्यक्तियों को कारागार से हटाने की अनुज्ञा दी जाए तो लोक-व्यवस्था में विघ्न की संभाव्यता ;
भारत का राजपत्र असाधारण 304. जहां वह व्यक्ति, जिसके बारे में धारा 302 के अधीन कोई आदेश दिया गया
(क) बीमारी या अंगशैथिल्य के कारण कारागार से हटाए जाने के योग्य नहीं है; या
(ख) विचारण के लिए सुपुर्दगी के अधीन है या विचारण के लंबित रहने तक के लिए या प्रारंभिक अन्वेषण तक के लिए प्रतिप्रेषणाधीन है ; या
(ग) इतनी अवधि के लिए अभिरक्षा में है जितनी आदेश का अनुपालन करने के लिए और उस कारागार में जिसमें वह परिरुदूध या निरुद्ध है, उसे वापस ले आने के लिए अपेक्षित समय के समाप्त होने के पूर्व समाप्त होती है ; या
(घ) ऐसा व्यक्ति है जिसे धारा 303 के अधीन राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा दिया गया कोई आदेश लागू होता है,
वहां कारागार का भारसाधक अधिकारी न्यायालय के आदेश को कार्यान्वित नहीं करेगा और ऐसा न करने के कारणों का विवरण न्यायालय को भेजेगा :
परन्तु जहां ऐसे व्यक्ति से किसी ऐसे स्थान पर, जो कारागार से पच्चीस किलोमीटर से अधिक दूर नहीं है, साक्ष्य देने के लिए उपस्थित होने की अपेक्षा की जाती है, वहां कारागार के भारसाधक अधिकारी के ऐसा न करने का कारण खंड (ख) में वर्णित कारण नहीं होगा ।
Source: India Code — The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023. All BNSS sections
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