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BNSS Section 403 (CrPC 362) — Court not to alter judgment
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) धारा 403 (पुरानी सीआरपीसी 362) — न्यायालय निर्णय में परिवर्तन नहीं करेगा
| Law / कानून | Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) |
|---|---|
| Section / धारा | 403 |
| Chapter / अध्याय | Chapter XXX — |
| Old law / पुरानी धारा | Code of Criminal Procedure (CrPC) — CrPC 362 |
सरल हिंदी सार
न्यायालय निर्णय में परिवर्तन नहीं करेगा
निर्णय पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद न्यायालय उसमें परिवर्तन नहीं कर सकता, सिवाय लिपिकीय या गणितीय त्रुटियों के सुधार के।
निर्णय पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद न्यायालय उसमें परिवर्तन नहीं कर सकता, सिवाय लिपिकीय या गणितीय त्रुटियों के सुधार के।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बीएनएसएस धारा 403 क्या है? / What is BNSS Section 403?
Court not to alter judgment — न्यायालय निर्णय में परिवर्तन नहीं करेगा: निर्णय पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद न्यायालय उसमें परिवर्तन नहीं कर सकता, सिवाय लिपिकीय या गणितीय त्रुटियों के सुधार के।
बीएनएसएस धारा 403 पुरानी सीआरपीसी की कौन-सी धारा है? / Which old CrPC section is BNSS Section 403?
BNSS Section 403 = CrPC 362. Court not to alter judgment
Full text (English)
Save as otherwise provided by this Sanhita or by any other law for the time being in force, no Court, when it has signed its judgment or final order disposing of a case, shall alter or review the same except to correct a clerical or arithmetical error.
पूरा पाठ (हिंदी)
इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा जैसा उपबंधित है उसके सिवाय, कोई न्यायालय जब उसने किसी मामले को निपटाने के लिए अपने निर्णय या अंतिम आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं तब लिपिकीय या गणितीय भूल को ठीक करने के सिवाय उसमें कोई परिवर्तन नहीं करेगा या उसका पुनर्विलोकन नहीं करेगा ।
🔎 सरल सार, केस-लॉ और बोलकर/फ़ोटो से धारा खोजेंSource: India Code — The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023. All BNSS sections
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