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BNSS Section 417 (CrPC 376) — No appeal in petty cases
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) धारा 417 (पुरानी सीआरपीसी 376)
| Law / कानून | Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) |
|---|---|
| Section / धारा | 417 |
| Chapter / अध्याय | Chapter XXXI — Appeals |
| Old law / पुरानी धारा | Code of Criminal Procedure (CrPC) — CrPC 376 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बीएनएसएस धारा 417 क्या है? / What is BNSS Section 417?
No appeal in petty cases
बीएनएसएस धारा 417 पुरानी सीआरपीसी की कौन-सी धारा है? / Which old CrPC section is BNSS Section 417?
BNSS Section 417 = CrPC 376. No appeal in petty cases
Full text (English)
Notwithstanding anything in section 415, there shall be no appeal by a convicted person in any of the following cases, namely: —
(a) where a High Court passes only a sentence of imprisonment for a term not exceeding three months or of fine not exceeding one thousand rupees, or of both such imprisonment and fine;
(b) where a Court of Session passes only a sentence of imprisonment for a term not exceeding three months or of fine not exceeding two hundred rupees, or of both such imprisonment and fine;
(c) where a Magistrate of the first class passes only a sentence of fine not exceeding one hundred rupees; or
(d) where, in a case tried summarily, a Magistrate empowered to act under section 283 passes only a sentence of fine not exceeding two hundred rupees:
Provided that an appeal may be brought against any such sentence if any other punishment is combined with it, but such sentence shall not be appealable merely on the ground—
(i) that the person convicted is ordered to furnish security to keep the peace; or
(ii) that a direction for imprisonment in default of payment of fine is included in the sentence; or
(iii) that more than one sentence of fine is passed in the case, if the total amount of fine imposed does not exceed the amount hereinbefore specified in respect of the case.
(a) where a High Court passes only a sentence of imprisonment for a term not exceeding three months or of fine not exceeding one thousand rupees, or of both such imprisonment and fine;
(b) where a Court of Session passes only a sentence of imprisonment for a term not exceeding three months or of fine not exceeding two hundred rupees, or of both such imprisonment and fine;
(c) where a Magistrate of the first class passes only a sentence of fine not exceeding one hundred rupees; or
(d) where, in a case tried summarily, a Magistrate empowered to act under section 283 passes only a sentence of fine not exceeding two hundred rupees:
Provided that an appeal may be brought against any such sentence if any other punishment is combined with it, but such sentence shall not be appealable merely on the ground—
(i) that the person convicted is ordered to furnish security to keep the peace; or
(ii) that a direction for imprisonment in default of payment of fine is included in the sentence; or
(iii) that more than one sentence of fine is passed in the case, if the total amount of fine imposed does not exceed the amount hereinbefore specified in respect of the case.
पूरा पाठ (हिंदी)
धारा 445 में किसी बात के होते हुए भी, दोषसिद्ध व्यक्ति द्वारा कोई... छोटे मामलों मैं
अपील निम्नलिखित में से किसी मामले में नहीं होगी, अर्थात् :-- जम
(क) जहां उच्च न्यायालय केवल तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या एक हजार रुपए से अनधिक जुर्माने का या ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है ;
(ख) जहां सेशन न्यायालय केवल तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का या ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है ;
(ग). जहां प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट केवल एक सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश पारित करता है ; या (घ) जहां संक्षेपत: विचारित किसी मामले में, धारा 283 के अधीन कार्य करने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट केवल दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश पारित करता है : परन्तु यदि ऐसे किसी दंडादेश के साथ कोई अन्य दंड मिला दिया गया है तो ऐसे किसी दंडादेश के विरुद्ध अपील की जा सकेगी किन्तु वह केवल इस आधार पर अपीलनीय न हो जाएगा कि- (9) दोषसिद्ध व्यक्ति को परिशान्ति कायम रखने के लिए प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया है ; या (हा जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास के निदेश को दंडादेश में सम्मिलित किया गया है ; या (फ) उस मामले में जुर्माने का एक से अधिक दंडादेश पारित किया गया है, यदि अधिरोपित जुर्माने की कुल रकम उस मामले के संबंध में इसमें इसके पूर्व विनिर्दिष्ट रकम से अधिक नहीं है । 48. (1) उपधारा (2) में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय, राज्य सरकार, राज्य... सरकार उच्च न्यायालय से भिन्न किसी न्यायालय द्वारा किए गए विचारण में दोषसिद्धि के उवारा देश कै ल किसी मामले में लोक अभियोजक को दंडादेश की अपर्याप्तता के आधार पर उसके दी विरुद्ध--
(क) सेशन न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किया जाता है ; और (ख) उच्च न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी अन्य न्यायालय द्वारा पारित किया जाता है, अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगी । (2) यदि ऐसी दोषसिद्धि किसी ऐसे मामले में है जिसमें अपराध का अन्वेषण इस संहिता से भिन्न किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन अपराध का अन्वेषण करने के लिए सशक्त किसी अन्य अभिकरण द्वारा किया गया है तो केन्द्रीय सरकार भी लोक अभियोजक को दंडादेश की अपर्याप्तता के आधार पर उसके विरुद्ध--
(क) सेशन न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किया जाता है ; और
(ख) उच्च न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी अन्य न्यायालय द्वारा पारित किया जाता है,
अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगी ।
(3) जब दंडादेश के विरुद्ध अपर्याप्तता के आधार पर अपील की गई है तब यथास्थिति, सेशन न्यायालय या उच्च न्यायालय उस दंडादेश में वृद्धि तब तक नहीं करेगा जब तक कि अभियुक्त को ऐसी वृद्धि के विरुद्ध कारण दर्शित करने का युक्तियुक्त अवसर नहीं दे दिया गया है और कारण दर्शित करते समय अभियुक्त अपनी दोषमुक्ति के लिए या दंडादेश में कमी करने के लिए अभिवचन कर सकेगा ।
(4) जब कोई अपील, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 70 या धारा 7। के अधीन पारित किसी कारावास के विरुद्ध फाइल की गई है, तो ऐसी अपील फाइल करने की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर ऐसी अपील का निपटारा किया जाएगा ।
🔎 सरल सार, केस-लॉ और बोलकर/फ़ोटो से धारा खोजेंअपील निम्नलिखित में से किसी मामले में नहीं होगी, अर्थात् :-- जम
(क) जहां उच्च न्यायालय केवल तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या एक हजार रुपए से अनधिक जुर्माने का या ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है ;
(ख) जहां सेशन न्यायालय केवल तीन मास से अनधिक की अवधि के कारावास का या दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का या ऐसे कारावास और जुर्माने दोनों का, दंडादेश पारित करता है ;
(ग). जहां प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट केवल एक सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश पारित करता है ; या (घ) जहां संक्षेपत: विचारित किसी मामले में, धारा 283 के अधीन कार्य करने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट केवल दो सौ रुपए से अनधिक जुर्माने का दंडादेश पारित करता है : परन्तु यदि ऐसे किसी दंडादेश के साथ कोई अन्य दंड मिला दिया गया है तो ऐसे किसी दंडादेश के विरुद्ध अपील की जा सकेगी किन्तु वह केवल इस आधार पर अपीलनीय न हो जाएगा कि- (9) दोषसिद्ध व्यक्ति को परिशान्ति कायम रखने के लिए प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया है ; या (हा जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास के निदेश को दंडादेश में सम्मिलित किया गया है ; या (फ) उस मामले में जुर्माने का एक से अधिक दंडादेश पारित किया गया है, यदि अधिरोपित जुर्माने की कुल रकम उस मामले के संबंध में इसमें इसके पूर्व विनिर्दिष्ट रकम से अधिक नहीं है । 48. (1) उपधारा (2) में जैसा अन्यथा उपबंधित है, उसके सिवाय, राज्य सरकार, राज्य... सरकार उच्च न्यायालय से भिन्न किसी न्यायालय द्वारा किए गए विचारण में दोषसिद्धि के उवारा देश कै ल किसी मामले में लोक अभियोजक को दंडादेश की अपर्याप्तता के आधार पर उसके दी विरुद्ध--
(क) सेशन न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किया जाता है ; और (ख) उच्च न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी अन्य न्यायालय द्वारा पारित किया जाता है, अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगी । (2) यदि ऐसी दोषसिद्धि किसी ऐसे मामले में है जिसमें अपराध का अन्वेषण इस संहिता से भिन्न किसी केन्द्रीय अधिनियम के अधीन अपराध का अन्वेषण करने के लिए सशक्त किसी अन्य अभिकरण द्वारा किया गया है तो केन्द्रीय सरकार भी लोक अभियोजक को दंडादेश की अपर्याप्तता के आधार पर उसके विरुद्ध--
(क) सेशन न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित किया जाता है ; और
(ख) उच्च न्यायालय में, यदि दंडादेश किसी अन्य न्यायालय द्वारा पारित किया जाता है,
अपील प्रस्तुत करने का निदेश दे सकेगी ।
(3) जब दंडादेश के विरुद्ध अपर्याप्तता के आधार पर अपील की गई है तब यथास्थिति, सेशन न्यायालय या उच्च न्यायालय उस दंडादेश में वृद्धि तब तक नहीं करेगा जब तक कि अभियुक्त को ऐसी वृद्धि के विरुद्ध कारण दर्शित करने का युक्तियुक्त अवसर नहीं दे दिया गया है और कारण दर्शित करते समय अभियुक्त अपनी दोषमुक्ति के लिए या दंडादेश में कमी करने के लिए अभिवचन कर सकेगा ।
(4) जब कोई अपील, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 70 या धारा 7। के अधीन पारित किसी कारावास के विरुद्ध फाइल की गई है, तो ऐसी अपील फाइल करने की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर ऐसी अपील का निपटारा किया जाएगा ।
Source: India Code — The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023. All BNSS sections
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