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BSA Section 16 (Evidence Act 18) — Admission by party to proceeding or his agent
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) धारा 16 (पुरानी साक्ष्य अधिनियम 18)
| Law / कानून | Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 (BSA) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) |
|---|---|
| Section / धारा | 16 |
| Chapter / अध्याय | Chapter II — Relevancy Of Facts |
| Old law / पुरानी धारा | Indian Evidence Act, 1872 — Evidence Act 18 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बीएसए धारा 16 क्या है? / What is BSA Section 16?
Admission by party to proceeding or his agent
बीएसए धारा 16 पुरानी साक्ष्य अधिनियम की कौन-सी धारा है? / Which old Evidence Act section is BSA Section 16?
BSA Section 16 = Evidence Act 18. Admission by party to proceeding or his agent
Full text (English)
(1) Statements made by a party to the proceeding, or by an agent to any such party, whom the Court regards, under the circumstances of the case, as expressly or impliedly authorised by him to make them, are admissions.
(2) Statements made by—
(i) parties to suits suing or sued in a representative character, are not admissions, unless they were made while the party making them held that character; or
(ii) (a) persons who have any proprietary or pecuniary interest in the subject matter of the proceeding, and who make the statement in their character of persons so interested; or
(b) persons from whom the parties to the suit have derived their interest in the subject matter of the suit, are admissions, if they are made during the continuance of the interest of the persons making the statements.
(2) Statements made by—
(i) parties to suits suing or sued in a representative character, are not admissions, unless they were made while the party making them held that character; or
(ii) (a) persons who have any proprietary or pecuniary interest in the subject matter of the proceeding, and who make the statement in their character of persons so interested; or
(b) persons from whom the parties to the suit have derived their interest in the subject matter of the suit, are admissions, if they are made during the continuance of the interest of the persons making the statements.
पूरा पाठ (हिंदी)
(1) वे कथन स्वीकृतियां हैं, जिन्हें कार्यवाही के किसी पक्षकार ने किया है, या ऐसे किसी पक्षकार के ऐसे किसी अभिकर्ता द्वारा किया गया है, जिसे न्यायालय मामले की परिस्थितियों में उन कथनों को करने के लिए उस पक्षकार द्वारा अभिव्यक्त या विवक्षित रूप से प्राधिकृत किया हुआ मानता है ।
(1) वाद के ऐसे पक्षकारों द्वारा, जो प्रतिनिधि की हैसियत में वाद ला रहे हैं या जिन पर प्रतिनिधि की हैसियत में वाद लाया जा रहा है, तब तक स्वीकृतियां नहीं हैं, जब तक कि वे उस समय न किए गए हों जबकि उनको करने वाला पक्षकार वैसी हैसियत धारण करता था ; या
(ी) (क) ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं, जिनका कार्यवाही की विषय-वस्तु मैं कोई साम्पत्तिक या धन संबंधी हित है और जो इस प्रकार हितबदूध व्यक्तियों की हैसियत में वह कथन करते हैं ; या
(ख) ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं, जिनसे वाद के पक्षकारों का वाद की विषय-वस्तु में अपना हित व्युत्पन्न हुआ है,
यदि वे कथन उन्हैं करने वाले व्यक्तियों के हित के बने रहने के दौरान किए गए हैं ।
47.. वे कथन, जो उन व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं जिनकी स्थिति या दायित्व, वाद के किसी पक्षकार के विरुद्ध साबित करना आवश्यक है, स्वीकृतियां हैं, यदि ऐसे कथन ऐसे व्यक्तियों द्वारा, या उन पर लाए गए वाद में ऐसी स्थिति या दायित्व के संबंध में ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध सुसंगत होते और यदि वे उस समय किए गए हैं जबकि उन्हें करने वाला व्यक्ति ऐसी स्थिति ग्रहण किए हुए हैं या ऐसे दायित्व के अधीन हैं ।
ख के लिए किराया संग्रह करने का दायित्व क लेता है । ग द्वारा ख को देय किराया संग्रह न करने के लिए क पर ख वाद लाता है । क इस बात से इंकार करता है कि ग से ख को किराया देय था । ग द्वारा यह कथन कि उस पर ख को किराया देय है स्वीकृति है, और यदि क इस बात से इंकार करता है कि ग द्वारा ख को किराया देय था तो वह क के विरुद्ध सुसंगत तथ्य है ।
🔎 सरल सार, केस-लॉ और बोलकर/फ़ोटो से धारा खोजें(1) वाद के ऐसे पक्षकारों द्वारा, जो प्रतिनिधि की हैसियत में वाद ला रहे हैं या जिन पर प्रतिनिधि की हैसियत में वाद लाया जा रहा है, तब तक स्वीकृतियां नहीं हैं, जब तक कि वे उस समय न किए गए हों जबकि उनको करने वाला पक्षकार वैसी हैसियत धारण करता था ; या
(ी) (क) ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं, जिनका कार्यवाही की विषय-वस्तु मैं कोई साम्पत्तिक या धन संबंधी हित है और जो इस प्रकार हितबदूध व्यक्तियों की हैसियत में वह कथन करते हैं ; या
(ख) ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं, जिनसे वाद के पक्षकारों का वाद की विषय-वस्तु में अपना हित व्युत्पन्न हुआ है,
यदि वे कथन उन्हैं करने वाले व्यक्तियों के हित के बने रहने के दौरान किए गए हैं ।
47.. वे कथन, जो उन व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं जिनकी स्थिति या दायित्व, वाद के किसी पक्षकार के विरुद्ध साबित करना आवश्यक है, स्वीकृतियां हैं, यदि ऐसे कथन ऐसे व्यक्तियों द्वारा, या उन पर लाए गए वाद में ऐसी स्थिति या दायित्व के संबंध में ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध सुसंगत होते और यदि वे उस समय किए गए हैं जबकि उन्हें करने वाला व्यक्ति ऐसी स्थिति ग्रहण किए हुए हैं या ऐसे दायित्व के अधीन हैं ।
ख के लिए किराया संग्रह करने का दायित्व क लेता है । ग द्वारा ख को देय किराया संग्रह न करने के लिए क पर ख वाद लाता है । क इस बात से इंकार करता है कि ग से ख को किराया देय था । ग द्वारा यह कथन कि उस पर ख को किराया देय है स्वीकृति है, और यदि क इस बात से इंकार करता है कि ग द्वारा ख को किराया देय था तो वह क के विरुद्ध सुसंगत तथ्य है ।
Source: India Code — The Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 (As on 6 Oct 2025). All BSA sections
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