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BSA Section 3 (Evidence Act 5) — Evidence may be given of facts in issue and relevant facts

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) धारा 3 (पुरानी साक्ष्य अधिनियम 5) — तथ्यों का साक्ष्य

Law / कानूनBharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 (BSA)
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए)
Section / धारा3
Chapter / अध्यायChapter II — Relevancy Of Facts
Old law / पुरानी धाराIndian Evidence Act, 1872 — Evidence Act 5

सरल हिंदी सार

तथ्यों का साक्ष्य
न्यायालय में केवल विवाद्यक तथ्यों और उनसे सुसंगत तथ्यों का ही साक्ष्य दिया जा सकता है, किसी अन्य तथ्य का नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बीएसए धारा 3 क्या है? / What is BSA Section 3?
Evidence may be given of facts in issue and relevant facts — तथ्यों का साक्ष्य: न्यायालय में केवल विवाद्यक तथ्यों और उनसे सुसंगत तथ्यों का ही साक्ष्य दिया जा सकता है, किसी अन्य तथ्य का नहीं।

बीएसए धारा 3 पुरानी साक्ष्य अधिनियम की कौन-सी धारा है? / Which old Evidence Act section is BSA Section 3?
BSA Section 3 = Evidence Act 5. Evidence may be given of facts in issue and relevant facts

Full text (English)

Evidence may be given in any suit or proceeding of the existence or non-existence of every fact in issue and of such other facts as are hereinafter declared to be relevant, and of no others.
Explanation.—This section shall not enable any person to give evidence of a fact which he is disentitled to prove by any provision of the law for the time being in force relating to civil procedure.
Illustrations.
(a) A is tried for the murder of B by beating him with a club with the intention of causing his death. od At A’s trial the following facts are in issue:— aC A’s beating B with the club; A’s intention to cause B’s death. di A’s causing B’s death by such beating;
(b) A suitor does not bring with him, and have in readiness for production at the first hearing of the case, a bond on which he relies. This section does not enable him to produce the bond or prove its contents at a subsequent stage of the proceedings, otherwise than in accordance with the conditions prescribed by the Code of Civil Procedure, 1908 (5 of 1908). Closely connected facts

पूरा पाठ (हिंदी)

किसी वाद या कार्यवाही में प्रत्येक विवाद्यक तथ्य के और ऐसे अन्य तथ्यों के, जिन्हें इसमें इसके पश्चात्‌ सुसंगत घोषित किया गया है, अस्तित्व या अनस्तित्व का साक्ष्य दिया जा सकेगा, किसी अन्य का नहीं ।
स्पष्टीकरण--यह धारा किसी व्यक्ति को ऐसे तथ्य का साक्ष्य देने हेतु समर्थ नहीं बनाएगी, जिससे सिविल प्रक्रिया से संबंधित किसी तत्समय प्रवृत्त विधि के किसी उपबन्ध द्वारा वह साबित करने के हक से वंचित कर दिया गया है ।
(क) ख की मृत्यु कारित करने के आशय से उसे लाठी से मारकर उसकी हत्या कारित करने के लिए क का विचारण किया जाता है ।
क के विचारण में निम्नलिखित तथ्य विवाद्य हैं :--
क का ऐसी मार द्वारा ख की मृत्यु कारित करना; ख की मृत्यु कारित करने का क का आशय । (ख) एक वादकर्ता अपने साथ वह बन्धपत्र, जिस पर वह निर्भर करता है, मामले की पहली सुनवाई पर अपने साथ नहीं लाता है और प्रस्तुत करने के लिए तैयार नहीं रखता है । यह धारा उसे समर्थ नहीं बनाती कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 908 द्वारा विहित शर्तों के अनुसार से अन्यथा, वह उस कार्यवाही के उत्तरवर्ती प्रक्रम में उस बन्धपत्र को प्रस्तुत कर सके या उसकी अन्तर्वस्तु को साबित कर सके । निकटता से संबद्ध तथ्य 4. जो तथ्य विवाद्य न होते हुए भी किसी विवाद्यक तथ्य या सुसंगत तथ्य से इस प्रकार संबद्ध है कि वे एक ही संव्यवहार के भाग हैं, वे तथ्य सुसंगत हैं, चाहे वे उसी समय और स्थान पर या विभिन्‍न समयों और स्थानों पर घटित हुए हों । दृष्टांत (क) ख को पीटकर उसकी हत्या करने का क अभियुक्त है । क या ख या पास खड़े लोगों द्वारा जो कुछ भी पिटाई के समय या उससे इतने अल्पकाल पूर्व या पश्चात्‌ कहा गया था या किया गया था कि वह उसी संव्यवहार का भाग बन गया है, वह सुसंगत तथ्य
(ख) क एक सशस्त्र विद्रोह में भाग लेकर, जिसमें संपत्ति नष्ट की जाती है, फौज पर आक्रमण किया जाता है और जेलें तोड़ कर खोली जाती हैं, भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने का अभियुक्त है । इन तथ्यों का घटित होना साधारण संव्यवहार का भाग होने के नाते सुसंगत है, चाहे क उन सभी में उपस्थित न रहा हो ।
(ग) क एक पत्र में, जो किसी पत्राचार का भाग है, अन्तर्विष्ट अपमान-लेख के लिए ख पर वाद लाता है । जिस विषय में अपमान-लेख उद्भूत हुआ है, उससे संबंधित पक्षकारों के बीच जितने पत्र उस पत्राचार के भाग हैं जिसमें वह अन्तर्विष्ट है, वे सुसंगत तथ्य हैं, चाहे उनमें वह अपमान-लेख स्वयं अन्तर्विष्ट न हो ।
(घ) प्रश्न यह है कि क्या ख से आदेशित अमुक माल क को दिया गया था । वह माल, अनुक्रमश: कई मध्यवर्ती व्यक्तियों को दिया गया था । प्रत्येक परिदान सुसंगत तथ्य है ।
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Source: India Code — The Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 (As on 6 Oct 2025). All BSA sections

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