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Article 355 — Duty of the Union to protect States against external aggression and internal disturbance
भारत का संविधान अनुच्छेद 355 — बाहय आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्य की संरक्षा करने का संघ का कर्तव्य
| Law / कानून | Constitution of India भारत का संविधान |
|---|---|
| Article / अनुच्छेद | 355 |
| Chapter / अध्याय | Part XVIII — Emergency Provisions |
सरल हिंदी सार
राज्यों की बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से रक्षा
संघ का कर्तव्य है कि वह हर राज्य की बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से रक्षा करे और सुनिश्चित करे कि राज्य की सरकार संविधान के अनुसार चले।
संघ का कर्तव्य है कि वह हर राज्य की बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से रक्षा करे और सुनिश्चित करे कि राज्य की सरकार संविधान के अनुसार चले।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
संविधान अनुच्छेद 355 क्या है? / What is Article 355?
Duty of the Union to protect States against external aggression and internal disturbance — राज्यों की बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से रक्षा: संघ का कर्तव्य है कि वह हर राज्य की बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से रक्षा करे और सुनिश्चित करे कि राज्य की सरकार संविधान के अनुसार चले।
Full text (English)
It shall be the duty of the Union to protect every State against external aggression and internal disturbance and to ensure that the Government of every State is carried on in accordance with the provisions of this Constitution.
पूरा पाठ (हिंदी)
संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह बाहय आक्रमण और आंतरिक अशान्ति से प्रत्येक राज्य की संरक्षा करे और प्रत्येक राज्य की सरकार का इस संविधान के उपबंधों के अनुसार चलाया जाना सुनिश्चित करे ।
Source: India Code — The Constitution of India (As on 10 Sep 2026). All Constitution articles
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