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CPC Section 13 — When foreign judgment not conclusive
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) धारा 13 — विदेशी निर्णय कब निश्चयक नहीं होगा
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | 13 |
| Chapter / अध्याय | Part I — Suits In General |
सरल हिंदी सार
विदेशी निर्णय कब निर्णायक नहीं
विदेशी न्यायालय का निर्णय छह स्थितियों में निर्णायक नहीं माना जाता: सक्षम न्यायालय न होना, गुणदोष पर निर्णय न होना, अंतरराष्ट्रीय/भारतीय विधि की ग़लत मान्यता, प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन, धोखे से प्राप्त होना, और भारतीय विधि का उल्लंघन।
विदेशी न्यायालय का निर्णय छह स्थितियों में निर्णायक नहीं माना जाता: सक्षम न्यायालय न होना, गुणदोष पर निर्णय न होना, अंतरराष्ट्रीय/भारतीय विधि की ग़लत मान्यता, प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन, धोखे से प्राप्त होना, और भारतीय विधि का उल्लंघन।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी धारा 13 क्या है? / What is CPC Section 13?
When foreign judgment not conclusive — विदेशी निर्णय कब निर्णायक नहीं: विदेशी न्यायालय का निर्णय छह स्थितियों में निर्णायक नहीं माना जाता: सक्षम न्यायालय न होना, गुणदोष पर निर्णय न होना, अंतरराष्ट्रीय/भारतीय विधि की ग़लत मान्यता, प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन, धोखे से प्राप्त होना, और भारतीय विधि का उल्लंघन।
Full text (English)
A foreign judgment shall be conclusive as to any matter thereby directly adjudicated upon between the same parties or between parties under whom they or any of them claim litigating under the same title except—
(a) where it has not been pronounced by a Court of competent jurisdiction;
(b) where it has not been given on the merits of the case;
(c) where it appears on the face of the proceedings to be founded on an incorrect view of international law or a refusal to recognise the law of 2[India] in cases in which such law is applicable;
(d) where the proceedings in which the judgment was obtained are opposed to natural justice;
(e) where it has been obtained by fraud;
(f) where it sustains a claim founded on a breach of any law in force in 2[India].
(a) where it has not been pronounced by a Court of competent jurisdiction;
(b) where it has not been given on the merits of the case;
(c) where it appears on the face of the proceedings to be founded on an incorrect view of international law or a refusal to recognise the law of 2[India] in cases in which such law is applicable;
(d) where the proceedings in which the judgment was obtained are opposed to natural justice;
(e) where it has been obtained by fraud;
(f) where it sustains a claim founded on a breach of any law in force in 2[India].
पूरा पाठ (हिंदी)
विदेशी निर्णय उसके द्वारा उन्हीं पक्षकारों के बीच या उसी हक के अधीन मुकदमा करने वाले ऐसे पक्षकारों के बीच, जिनसे व्युत्पन्न अधिकार के अधीन वे या उनमें से कोई दावा करते हैं, प्रत्यक्षतः न्यायनिर्णीत किसी विषय के बारे में वहां के सिवाय निश्चयक होगा जहां--
'क) वह सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा नहीं सुनाया गया है, । (ख) वह मामले के गुणागुण के आधार पर नहीं दिया गया है,
(ग) कार्यवाहियों के सकृत दर्शने स्पष्ट है कि वह अन्तरराष्ट्रीय विधि के अशुद्ध बोध पर या थ[भारत] की विधि को उन मामलों में जिनको वह लागू है, मान्यता देने से इंकार करने पर आधारित है,
(घ) वे कार्यवाहियां, जिनमें वह निर्णय अभिप्राप्त किया गया था, नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध हैं,
(ड) वह कपट द्वारा अभिप्राप्त किया गया है,
(च) वह [भारत] में प्रवृत्ति किसी विधि के भंग पर आधारित दावे को ठीक ठहराता है ।
'क) वह सक्षम अधिकारिता वाले न्यायालय द्वारा नहीं सुनाया गया है, । (ख) वह मामले के गुणागुण के आधार पर नहीं दिया गया है,
(ग) कार्यवाहियों के सकृत दर्शने स्पष्ट है कि वह अन्तरराष्ट्रीय विधि के अशुद्ध बोध पर या थ[भारत] की विधि को उन मामलों में जिनको वह लागू है, मान्यता देने से इंकार करने पर आधारित है,
(घ) वे कार्यवाहियां, जिनमें वह निर्णय अभिप्राप्त किया गया था, नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध हैं,
(ड) वह कपट द्वारा अभिप्राप्त किया गया है,
(च) वह [भारत] में प्रवृत्ति किसी विधि के भंग पर आधारित दावे को ठीक ठहराता है ।
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
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