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CPC Section 19 — Suits for compensation for wrongs to person or movables
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) धारा 19 — शरीर या जंगम सम्पत्ति के प्रति किए गए दोषों के लिए प्रतिकर के लिए वाद
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | 19 |
| Chapter / अध्याय | Part I — Suits In General |
सरल हिंदी सार
व्यक्ति या चल संपत्ति के प्रति अपकार के लिए वाद
व्यक्ति या चल संपत्ति को हुई क्षति के लिए वाद वहाँ भी दायर हो सकता है जहाँ अपकार हुआ और वहाँ भी जहाँ प्रतिवादी रहता या कारोबार करता है।
व्यक्ति या चल संपत्ति को हुई क्षति के लिए वाद वहाँ भी दायर हो सकता है जहाँ अपकार हुआ और वहाँ भी जहाँ प्रतिवादी रहता या कारोबार करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी धारा 19 क्या है? / What is CPC Section 19?
Suits for compensation for wrongs to person or movables — व्यक्ति या चल संपत्ति के प्रति अपकार के लिए वाद: व्यक्ति या चल संपत्ति को हुई क्षति के लिए वाद वहाँ भी दायर हो सकता है जहाँ अपकार हुआ और वहाँ भी जहाँ प्रतिवादी रहता या कारोबार करता है।
Full text (English)
Where a suit is for compensation for wrong done to the person or to movable property, if the wrong was done within the local limits of the jurisdiction of one Court and the defendant resides, or carries on business, or personally works for gain, within the local limits of the jurisdiction of another Court, the suit may be instituted at the option of the plaintiff in either of the said Courts.
Illustrations
(a) A, residing in Delhi, beats B in Calcutta. B may sue A either in Calcutta or in Delhi.
(b) A, residing in Delhi, publishes in Calcutta statements defamatory of B. B may sue A either in Calcutta or in Delhi.
Illustrations
(a) A, residing in Delhi, beats B in Calcutta. B may sue A either in Calcutta or in Delhi.
(b) A, residing in Delhi, publishes in Calcutta statements defamatory of B. B may sue A either in Calcutta or in Delhi.
पूरा पाठ (हिंदी)
जहां वाद शरीर या जंगम सम्पत्ति के प्रति किए गए दोष के लिए प्रतिकर के लिए है वहां यदि दोष एक न्यायालय की अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर किया गया था और प्रतिवादी किसी अन्य न्यायालय की अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर निवास करता है या कारबार करता है या अभिलाभ के लिए स्वयं काम करता है तो वाद वादी के विकल्प पर उक्त न्यायालयों में से किसी भी न्यायालय में संस्थित किया जा सकेगा ।
दृष्टांत
(क) दिल्ली में निवास करने वाला क कलकत्ते में ख को पीटता है । ख कलकत्ते में या दिल्ली में क पर वाद ला सकेगा ।
(ख) ख की मानहानि करने वाले कथन दिल्ली में निवास करने वाला क कलकत्ते में प्रकाशित करता है । ख कलकत्ते में या दिल्ली में क पर वाद ला सकेगा ।
दृष्टांत
(क) दिल्ली में निवास करने वाला क कलकत्ते में ख को पीटता है । ख कलकत्ते में या दिल्ली में क पर वाद ला सकेगा ।
(ख) ख की मानहानि करने वाले कथन दिल्ली में निवास करने वाला क कलकत्ते में प्रकाशित करता है । ख कलकत्ते में या दिल्ली में क पर वाद ला सकेगा ।
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
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