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CPC Section 28 — Service of summons where defendant resides in another State
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) धारा 28 — जहां प्रतिवादी किसी अन्य राज्य में निवास करता है वहां समन की तामील
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | 28 |
| Chapter / अध्याय | Part I — Suits In General |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी धारा 28 क्या है? / What is CPC Section 28?
Service of summons where defendant resides in another State
Full text (English)
(1) A summons may be sent for service in another State to such Court and in such manner as may be prescribed by rules in force in that State.
(2) The Court to which such summons is sent shall, upon receipt thereof, proceed as if it had been issued by such Court and shall then return the summons to the Court of issue together with the record (if any) of its proceedings with regard thereto. [(3) Where the language of the summons sent for service in another State is different from the language of the record referred to in sub-section (2), a translation of the record,—
(a) in Hindi, where the language of the Court issuing the summons is Hindi, or
(b) in Hindi or English where the language of such record is other than Hindi or English, shall also be sent together with the record sent under that sub-section.]
(2) The Court to which such summons is sent shall, upon receipt thereof, proceed as if it had been issued by such Court and shall then return the summons to the Court of issue together with the record (if any) of its proceedings with regard thereto. [(3) Where the language of the summons sent for service in another State is different from the language of the record referred to in sub-section (2), a translation of the record,—
(a) in Hindi, where the language of the Court issuing the summons is Hindi, or
(b) in Hindi or English where the language of such record is other than Hindi or English, shall also be sent together with the record sent under that sub-section.]
पूरा पाठ (हिंदी)
(1) समन अन्य राज्य में तामील किए जाने के लिए ऐसे न्यायालय को और ऐसी रीति से भेजा जा सकेगा जो उस राज्य में प्रवृत्त नियमों द्वारा विहित की जाए ।
(2) वह न्यायालय जिसे ऐसा समन भेजा जाता है, उसकी प्राप्ति पर आगे ऐसे कार्यवाही करेगा मानो वह उस न्यायालय द्वारा ही निकाला गया हो और तब वह उस समन को तथा उसके बारे में अपनी कार्यवाहियों के अभिलेख को (यदि कोई हो) उसे निकालने वाले न्यायालय को लौटाएगा ।
“[(3) जहां किसी दूसरे राज्य में तामील के लिए भेजे गए समन की भाषा उपधारा (2) में निर्दिष्ट अभिलेख की भाषा से भिन्न है वहां उस उपधारा के अधीन भेजे गए अभिलेख के साथ उसके साथ उसका,--
(क) यदि समन जारी करने वाले न्यायालय की भाषा हिन्दी है तो, हिन्दी में ; या (ख) यदि ऐसे अभिलेख की भाषा हिन्दी या अंग्रेजी से भिन्न है तो, हिन्दी या अंग्रेजी में, अनुवाद भी भेजा जाएगा । 5[29. विदेशी समनों की तामील--वे समन और अन्य आदेशिकाएं जो--
(क) भारत के किसी भी ऐसे भाग में स्थापित किसी सिविल या राजस्व न्यायालय द्वारा जिस पर इस संहिता के उपबन्धों का विस्तार नहीं है ; अथवा
(ख) किसी ऐसे सिविल या राजस्व न्यायालय द्वारा जो केन्द्रीय सरकार के प्राधिकार से भारत के बाहर स्थापित किया गया है या चालू रखा गया है ; अथवा
(ग) भारत के बाहर के किसी अन्य ऐसे सिविल या राजस्व न्यायालय द्वारा जिसके बारे में केन्द्रीय सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह घोषित किया है कि उसे इस धारा के उपबन्ध लागू हैं,
निकाली गई हैं, उन राज्यक्षेत्रों में के न्यायालयों को भेजी जा सकेगी जिन पर इस संहिता का विस्तार है और उनकी तामील ऐसे की जा सकेगी मानो वे ऐसे न्यायालयों द्वारा निकाले गए समन हों ।]
(2) वह न्यायालय जिसे ऐसा समन भेजा जाता है, उसकी प्राप्ति पर आगे ऐसे कार्यवाही करेगा मानो वह उस न्यायालय द्वारा ही निकाला गया हो और तब वह उस समन को तथा उसके बारे में अपनी कार्यवाहियों के अभिलेख को (यदि कोई हो) उसे निकालने वाले न्यायालय को लौटाएगा ।
“[(3) जहां किसी दूसरे राज्य में तामील के लिए भेजे गए समन की भाषा उपधारा (2) में निर्दिष्ट अभिलेख की भाषा से भिन्न है वहां उस उपधारा के अधीन भेजे गए अभिलेख के साथ उसके साथ उसका,--
(क) यदि समन जारी करने वाले न्यायालय की भाषा हिन्दी है तो, हिन्दी में ; या (ख) यदि ऐसे अभिलेख की भाषा हिन्दी या अंग्रेजी से भिन्न है तो, हिन्दी या अंग्रेजी में, अनुवाद भी भेजा जाएगा । 5[29. विदेशी समनों की तामील--वे समन और अन्य आदेशिकाएं जो--
(क) भारत के किसी भी ऐसे भाग में स्थापित किसी सिविल या राजस्व न्यायालय द्वारा जिस पर इस संहिता के उपबन्धों का विस्तार नहीं है ; अथवा
(ख) किसी ऐसे सिविल या राजस्व न्यायालय द्वारा जो केन्द्रीय सरकार के प्राधिकार से भारत के बाहर स्थापित किया गया है या चालू रखा गया है ; अथवा
(ग) भारत के बाहर के किसी अन्य ऐसे सिविल या राजस्व न्यायालय द्वारा जिसके बारे में केन्द्रीय सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह घोषित किया है कि उसे इस धारा के उपबन्ध लागू हैं,
निकाली गई हैं, उन राज्यक्षेत्रों में के न्यायालयों को भेजी जा सकेगी जिन पर इस संहिता का विस्तार है और उनकी तामील ऐसे की जा सकेगी मानो वे ऐसे न्यायालयों द्वारा निकाले गए समन हों ।]
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
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