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CPC Section 30 — Power to order discovery and the like
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) धारा 30 — प्रकटीकरण और उसके सदृश बातों के लिए आदेश करने की शक्ति
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | 30 |
| Chapter / अध्याय | Part I — Suits In General |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी धारा 30 क्या है? / What is CPC Section 30?
Power to order discovery and the like
Full text (English)
Subject to such conditions and limitations as may be prescribed, the Court may, at any time, either of its own motion or on the application of any party,—
(a) make such orders as may be necessary or reasonable in all matters relating to the delivery and answering of interrogatories, the admission of documents and facts, and the discovery, inspection, production, impounding and return of documents or other material objects producible as evidence;
(b) issue summonses to persons whose attendance is required either to give evidence or to produce documents or such other objects as aforesaid;
(c) order any fact to be proved by affidavit.
(a) make such orders as may be necessary or reasonable in all matters relating to the delivery and answering of interrogatories, the admission of documents and facts, and the discovery, inspection, production, impounding and return of documents or other material objects producible as evidence;
(b) issue summonses to persons whose attendance is required either to give evidence or to produce documents or such other objects as aforesaid;
(c) order any fact to be proved by affidavit.
पूरा पाठ (हिंदी)
ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, न्यायालय किसी भी समय या तो स्वप्रेरणा से या किसी भी पक्षकार के आवेदन पर--
(क) ऐसे आदेश कर सकेगा जो परिप्रश्नों के परिदान और उनका उत्तर देने से, दस्तावेजों और तथ्यों की स्वीकृति से और दस्तावेजों या अन्य भौतिक पदार्थों के जो साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने योग्य हों, प्रकटीकरण, निरीक्षण, पेश किए जाने, परिबद्ध किए जाने और लौटाए जाने से सम्बन्धित सभी विषयों के बारे में आवश्यक या युक्तियुक्त हैं ;
! [999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 2 द्वारा (-7-2002 से) धारा 26 को उसकी उपधारा (1) के रूप में पुनः संख्यांकित किया गया । 2 2076 के अधिनियम सं ० 4 की धारा 6 और अनुसूची द्वारा अंत:स्थापित ।
3 [999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 3 द्वारा (-7-2002 से) अंत:स्थापित ।
* |976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 2 द्वारा (-5-977 से) अन्तःस्थापित
5 [95 के अधिनियम सं० 2 की धारा 6 द्वारा धारा 29 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
(ख) ऐसे व्यक्तियों के नाम समन निकाल सकेगा जिनकी हाजिरी या तो साक्ष्य देने या दस्तावेजें पेश करने या पूर्वोक्त जैसे अन्य पदार्थों को पेश करने के लिए अपेक्षित हैं ;
(ग) यह आदेश दे सकेगा कि कोई तथ्य शपथपत्र द्वारा साबित किया जाए।
(क) ऐसे आदेश कर सकेगा जो परिप्रश्नों के परिदान और उनका उत्तर देने से, दस्तावेजों और तथ्यों की स्वीकृति से और दस्तावेजों या अन्य भौतिक पदार्थों के जो साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने योग्य हों, प्रकटीकरण, निरीक्षण, पेश किए जाने, परिबद्ध किए जाने और लौटाए जाने से सम्बन्धित सभी विषयों के बारे में आवश्यक या युक्तियुक्त हैं ;
! [999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 2 द्वारा (-7-2002 से) धारा 26 को उसकी उपधारा (1) के रूप में पुनः संख्यांकित किया गया । 2 2076 के अधिनियम सं ० 4 की धारा 6 और अनुसूची द्वारा अंत:स्थापित ।
3 [999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 3 द्वारा (-7-2002 से) अंत:स्थापित ।
* |976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 2 द्वारा (-5-977 से) अन्तःस्थापित
5 [95 के अधिनियम सं० 2 की धारा 6 द्वारा धारा 29 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
(ख) ऐसे व्यक्तियों के नाम समन निकाल सकेगा जिनकी हाजिरी या तो साक्ष्य देने या दस्तावेजें पेश करने या पूर्वोक्त जैसे अन्य पदार्थों को पेश करने के लिए अपेक्षित हैं ;
(ग) यह आदेश दे सकेगा कि कोई तथ्य शपथपत्र द्वारा साबित किया जाए।
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
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