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CPC Order 17 Rule 2 — Procedure if parties fail to appear on day fixed
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) आदेश 17 नियम 2 — यदि पक्षकार नियत दिन पर उपसंजात होने में असफल रहते हैं तो प्रक्रिया
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | O17R2 |
| Chapter / अध्याय | Adjournment |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी आदेश 17 नियम 2 क्या है? / What is CPC Order 17 Rule 2?
Procedure if parties fail to appear on day fixed
Full text (English)
Where, on any day to which the hearing of the suit is adjourned, the parties or any of them fail to appear, the Court may proceed to dispose of the suit in one of the modes directed in that behalf by Order IX or make such other order as it thinks fit. [Explanation.—Where the evidence or a substantial portion of the evidence of any party has already been recorded and such party fails to appear on any day to which the hearing of the suit is adjourned, the Court may, in its discretion proceed with the case as if such party were present.]
पूरा पाठ (हिंदी)
वाद की सुनवाई जिस दिन के लिए स्थगित हुई है यदि उस दिन पक्षकार या उनमें से कोई उपसंजात होने में असफल रहते हैं तो न्यायालय आदेश 9 द्वारा उस निमित्त निर्दिष्ट ढंगों में से एक से वाद का निपटारा करने के लिए अग्रसर हो सकेगा या ऐसा अन्य आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
' [999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 26 द्वारा (-7-2002 से) उपनियम (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित । 2 999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 26 द्वारा (-7-2002 से) कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । 3 976 के अधिनियम सं० 04 की धारा 68 द्वारा (-2-977 से) पूर्ववर्ती परन्तुक के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
'[स्पष्टीकरण--जहां किसी पक्षकार का साक्ष्य या साक्ष्य का पर्याप्त भाग पहले ही अभिलिखित किया जा चुका है और ऐसा पक्षकार किसी ऐसे दिन जिस दिन के लिए वाद की सुनवाई स्थगित की गई है उपसंजात होने में असफल रहता है वहां न्यायालय स्वविवेकानुसार उस मामले में इस प्रकार अग्रसर हो सकेगा मानो ऐसा पक्षकार उपस्थित हो ।]
' [999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 26 द्वारा (-7-2002 से) उपनियम (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित । 2 999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 26 द्वारा (-7-2002 से) कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित । 3 976 के अधिनियम सं० 04 की धारा 68 द्वारा (-2-977 से) पूर्ववर्ती परन्तुक के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
'[स्पष्टीकरण--जहां किसी पक्षकार का साक्ष्य या साक्ष्य का पर्याप्त भाग पहले ही अभिलिखित किया जा चुका है और ऐसा पक्षकार किसी ऐसे दिन जिस दिन के लिए वाद की सुनवाई स्थगित की गई है उपसंजात होने में असफल रहता है वहां न्यायालय स्वविवेकानुसार उस मामले में इस प्रकार अग्रसर हो सकेगा मानो ऐसा पक्षकार उपस्थित हो ।]
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
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