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CPC Order 20 Rule 6 — Contents of decree
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) आदेश 20 नियम 6 — डिक्री की अन्तर्वस्तु
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | O20R6 |
| Chapter / अध्याय | Judgment And Decree |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी आदेश 20 नियम 6 क्या है? / What is CPC Order 20 Rule 6?
Contents of decree
Full text (English)
(1) The decree shall agree with the judgment; it shall contain the number of the suit, the 3[names and descriptions of the parties, their registered addresses,] and particulars of the claim, and shall specify clearly the relief granted or other determination of the suit.
(2) The decree shall also state the amount of costs incurred in the suit, and by whom or out of what property and in what proportions such costs are to be paid.
(3) The Court may direct that the costs payable to one party by the other shall be set off against any sum which is admitted or found to be due from the former to the latter.
(2) The decree shall also state the amount of costs incurred in the suit, and by whom or out of what property and in what proportions such costs are to be paid.
(3) The Court may direct that the costs payable to one party by the other shall be set off against any sum which is admitted or found to be due from the former to the latter.
पूरा पाठ (हिंदी)
(1) डिक्री निर्णय के अनुरूप होगी, उसमें वाद का संख्यांक, पक्षकारों के नाम और वर्णन, उनके रजिस्ट्रीकृत पते] और दावे की विशिष्टियां अन्तर्विष्ट होंगी और अनुदत्त अनुतोष या वाद का अन्य अवधारण उसमें स्पष्टतया विनिर्दिष्ट होगा ।
(2) वाद में उपगत खर्चों की रकम भी और यह बात भी कि ऐसे खर्चे किसके द्वारा या किस सम्पत्ति में से और किसी अनुपात में संदत्त किया जाने हैं, डिक्री में कथित होगी ।
(3) न्यायालय निदेश दे सकेगा कि एक पक्षकार को दूसरे पक्षकार द्वारा खर्चे किसी ऐसी राशि के विरुद्ध मुजरा किए जाएं जिसके बारे में यह स्वीकर किया गया है या पाया गया है कि वह एक दूसरे को शोध्य हैं ।
अ[6क. डिक्री तैयार करना--(1) यह सुनिश्चित करने के लिए हर प्रयास किया जाएगा कि डिक्री जहां तक संभव हो शीघ्रता से और किसी भी दशा में उस तारीख से पंद्रह दिन के भीतर जिसको निर्णय सुनाया जाता है, तैयार की जाए ।
(2) डिक्री की प्रति फाइल किए बिना डिक्री के विरुद्ध अपील की जा सकेगी और किसी ऐसी दशा में न्यायालय द्वारा पक्षकार को उपलब्ध कराई गई प्रति आदेश 4! के नियम ! के प्रयोजनों के लिए डिक्री मानी जाएगी । किन्तु जैसे ही डिक्री तैयार हो जाती है, निर्णय निष्पादन के प्रयोजनों के लिए या किसी अन्य प्रयोजन के लिए डिक्री का प्रभाव नहीं रखेगा ।
(2) वाद में उपगत खर्चों की रकम भी और यह बात भी कि ऐसे खर्चे किसके द्वारा या किस सम्पत्ति में से और किसी अनुपात में संदत्त किया जाने हैं, डिक्री में कथित होगी ।
(3) न्यायालय निदेश दे सकेगा कि एक पक्षकार को दूसरे पक्षकार द्वारा खर्चे किसी ऐसी राशि के विरुद्ध मुजरा किए जाएं जिसके बारे में यह स्वीकर किया गया है या पाया गया है कि वह एक दूसरे को शोध्य हैं ।
अ[6क. डिक्री तैयार करना--(1) यह सुनिश्चित करने के लिए हर प्रयास किया जाएगा कि डिक्री जहां तक संभव हो शीघ्रता से और किसी भी दशा में उस तारीख से पंद्रह दिन के भीतर जिसको निर्णय सुनाया जाता है, तैयार की जाए ।
(2) डिक्री की प्रति फाइल किए बिना डिक्री के विरुद्ध अपील की जा सकेगी और किसी ऐसी दशा में न्यायालय द्वारा पक्षकार को उपलब्ध कराई गई प्रति आदेश 4! के नियम ! के प्रयोजनों के लिए डिक्री मानी जाएगी । किन्तु जैसे ही डिक्री तैयार हो जाती है, निर्णय निष्पादन के प्रयोजनों के लिए या किसी अन्य प्रयोजन के लिए डिक्री का प्रभाव नहीं रखेगा ।
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
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