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CPC Order 32 Rule 10 — Stay of proceedings on removal, etc., of next friend
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) आदेश 32 नियम 10 — वाद
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | O32R10 |
| Chapter / अध्याय | Married Trustee, Administratrix Or Executrix Shall Not As Such Be A Party To A Suit By Or Against Her. |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी आदेश 32 नियम 10 क्या है? / What is CPC Order 32 Rule 10?
Stay of proceedings on removal, etc., of next friend
Full text (English)
(1) On the retirement, removal or death of the next friend of a minor, further proceedings shall be stayed until the appointment of a next friend in his place.
(2) Where the pleader of such minor omits, within a reasonable time, to take steps to get a new next friend appointed, any person interested in the minor or in the matter in issue may, apply to the Court for the appointment of one, and the Court may appoint such person as it thinks fit.
(2) Where the pleader of such minor omits, within a reasonable time, to take steps to get a new next friend appointed, any person interested in the minor or in the matter in issue may, apply to the Court for the appointment of one, and the Court may appoint such person as it thinks fit.
पूरा पाठ (हिंदी)
मित्र के हटाए जाने, आदि पर कार्यवाहियों का रोका जाना--(1) अवयस्क के वाद-मित्र की निवृत्ति, हटाए जाने या मृत्यु पर आगे की कार्यवाहियां तब तक रोक रखी जाएंगी जब तक उसके स्थान में वाद-मित्र की नियुक्ति न हो जाए ।
(2) जहां ऐसे अवयस्क का प्लीडर नए वाद-मित्र के नियुक्त किए जाने के लिए युक्तियुक्त समय के भीतर कार्यवाही करने का लोप करता हे वहां उस अवयस्क में या विवादग्रस्त बात में हित रखने वाला कोई भी व्यक्ति न्यायालय से आवेदन कर सकेगा कि वाद- मित्र नियुक्त किया जाए और न्यायालय ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति कर सकेगा जिसे वह ठीक समझे ।
. वादार्थ संरक्षक की निवृत्ति, हटाया जाना या मृत्यु-(1) जहां वादार्थ संरक्षक निवृत्त होने की वांछा करता है, या अपना कर्तव्य नहीं करता या जहां अन्य पर्याप्त आधार दिखाया जाता है वहां न्यायालय ऐसे संरक्षक को निवृत्त होने के लिए अनुज्ञा दे सकेगा या उसे हटा सकेगा और खर्चों के सम्बन्ध में ऐसा आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
(2) जहां वादार्थ संरक्षक वाद के लम्बित रहने के दौरान निवृत्त हो जाता है, उसकी मृत्यु हो जाती है या वह न्यायालय द्वारा हटा दिया जाता है वहां न्यायालय उसके स्थान में नया संरक्षक नियुक्त करेगा ।
(2) जहां ऐसे अवयस्क का प्लीडर नए वाद-मित्र के नियुक्त किए जाने के लिए युक्तियुक्त समय के भीतर कार्यवाही करने का लोप करता हे वहां उस अवयस्क में या विवादग्रस्त बात में हित रखने वाला कोई भी व्यक्ति न्यायालय से आवेदन कर सकेगा कि वाद- मित्र नियुक्त किया जाए और न्यायालय ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति कर सकेगा जिसे वह ठीक समझे ।
. वादार्थ संरक्षक की निवृत्ति, हटाया जाना या मृत्यु-(1) जहां वादार्थ संरक्षक निवृत्त होने की वांछा करता है, या अपना कर्तव्य नहीं करता या जहां अन्य पर्याप्त आधार दिखाया जाता है वहां न्यायालय ऐसे संरक्षक को निवृत्त होने के लिए अनुज्ञा दे सकेगा या उसे हटा सकेगा और खर्चों के सम्बन्ध में ऐसा आदेश कर सकेगा जो वह ठीक समझे ।
(2) जहां वादार्थ संरक्षक वाद के लम्बित रहने के दौरान निवृत्त हो जाता है, उसकी मृत्यु हो जाती है या वह न्यायालय द्वारा हटा दिया जाता है वहां न्यायालय उसके स्थान में नया संरक्षक नियुक्त करेगा ।
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
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