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CPC Order 33 Rule 15 — Refusal to allow applicant to sue as 4[an indigent person] to bar subsequent application of like nature
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) आदेश 33 नियम 15 — निर्धन व्यक्ति के रूप में वाद लाने के लिए आवेदक को अनुज्ञा देने से इंकार के कारण वैसी ही प्रकृति के पश्चात्वर्ती आवेदन का वर्जन
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | O33R15 |
| Chapter / अध्याय | Explanation.—For The Avoidance Of Doubts, It Is Hereby Declared That The Provisions Of Rule 6 Shall Be |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी आदेश 33 नियम 15 क्या है? / What is CPC Order 33 Rule 15?
Refusal to allow applicant to sue as 4[an indigent person] to bar subsequent application of like nature
Full text (English)
An order refusing to allow the applicant to sue as 4[an indigent person] shall be a bar to any subsequent application of the like nature by him in respect of the same right to sue; but the applicant shall be at liberty to institute a suit in the ordinary manner in respect of such right; [provided that the plaint shall be rejected if he does not pay, either at the time of the institution of the suit or within such time thereafter as the Court may allow,] the costs (if any) incurred by the 1[State Government] and by the opposite party in opposing his application for leave to sue as 4[an indigent person].
पूरा पाठ (हिंदी)
*[निर्धन व्यक्ति] के रूप में वाद लाने के लिए आवेदक को अनुज्ञा देने से इन्कार करने वाला आदेश, वाद लाने के उसी अधिकार के लिए उसके द्वारा वैसी ही प्रकृति के किसी भी पश्चात्वर्ती आवेदन के लिए वर्जन होगा, किन्तु उसी अधिकार के संबंध में मामूली रीति से वाद संस्थित करने के लिए आवेदक स्वतन्त्र होगा : [परन्तु यदि वह निर्धन व्यक्ति के रूप में वाद लाने की इजाजत के लिए अपने आवेदन का विरोध करने में '[राज्य सरकार]
द्वारा और विरोधी पक्षकार द्वारा उपगत किए गए खर्चों का (यदि कोई हों) वाद संस्थित किए जाने के समय या उसके पश्चात् ऐसे समय के भीतर जो न्यायालय अनुज्ञात करे, संदाय नहीं करता है तो वाद-पत्र नामंजूर कर दिया जाएगा] ।
"[]5क. न्यायालय-फीस के संदाय के लिए समय का दिया जाना--नियम 5, नियम 7 या नियम 5 की कोई बात न्यायालय को नियम 5 के अधीन आवेदन को नामंजूर या नियम 7 के अधीन आवेदन को अनुज्ञप्त करने से इंकार करते समय इस बात से नहीं रोकेगी कि वह आवेदक को अपेक्षित न्यायालय-फीस का ऐसे समय के भीतर संदाय करने के लिए समय दे, जो न्यायालय द्वारा नियत किया जाए या समय-समय पर उसके द्वारा बढ़ाया जाए और ऐसा संदाय किया जाने पर और नियम 5 7*** में निर्दिष्ट खर्चों का उस समय के भीतर संदाय किए जाने पर यह समझा जाएगा कि वाद उस तारीख को संस्थित किया गया था जिस तारीख को निर्धन व्यक्ति के रूप में वाद लाने की अनुज्ञा के लिए आवेदन उपस्थापित किया गया था ।]
द्वारा और विरोधी पक्षकार द्वारा उपगत किए गए खर्चों का (यदि कोई हों) वाद संस्थित किए जाने के समय या उसके पश्चात् ऐसे समय के भीतर जो न्यायालय अनुज्ञात करे, संदाय नहीं करता है तो वाद-पत्र नामंजूर कर दिया जाएगा] ।
"[]5क. न्यायालय-फीस के संदाय के लिए समय का दिया जाना--नियम 5, नियम 7 या नियम 5 की कोई बात न्यायालय को नियम 5 के अधीन आवेदन को नामंजूर या नियम 7 के अधीन आवेदन को अनुज्ञप्त करने से इंकार करते समय इस बात से नहीं रोकेगी कि वह आवेदक को अपेक्षित न्यायालय-फीस का ऐसे समय के भीतर संदाय करने के लिए समय दे, जो न्यायालय द्वारा नियत किया जाए या समय-समय पर उसके द्वारा बढ़ाया जाए और ऐसा संदाय किया जाने पर और नियम 5 7*** में निर्दिष्ट खर्चों का उस समय के भीतर संदाय किए जाने पर यह समझा जाएगा कि वाद उस तारीख को संस्थित किया गया था जिस तारीख को निर्धन व्यक्ति के रूप में वाद लाने की अनुज्ञा के लिए आवेदन उपस्थापित किया गया था ।]
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
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