SUMI SETU › Laws / कानून › CPC › Order 33 Rule 9A

CPC Order 33 Rule 9A — Court to assign a pleader to an unrepresented indigent person

सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) आदेश 33 नियम 9A — निर्धन व्यक्ति के रूप में वाद लाने की अनुज्ञा का प्रत्याहरण

Law / कानूनCode of Civil Procedure, 1908 (CPC)
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी)
Section / धाराO33R9A
Chapter / अध्यायExplanation.—For The Avoidance Of Doubts, It Is Hereby Declared That The Provisions Of Rule 6 Shall Be

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

सीपीसी आदेश 33 नियम 9A क्या है? / What is CPC Order 33 Rule 9A?
Court to assign a pleader to an unrepresented indigent person

Full text (English)

(1) Where a person, who is permitted to sue as an indigent person, is not represented by a pleader, the Court-may, if the circumstances of the case so require, assign a pleader to him.
(2) The High Court may, with the previous approval of the State Government, make rules providing for—
(a) the mode of selecting pleaders to be assigned under sub-rule (1);
(b) the facilities to be provided to such pleaders by the Court ;
(c) any other matter which is required to be or may be provided by the rules for giving effect to the provisions of sub-rule (1).]

पूरा पाठ (हिंदी)

प्रतिवादी या सरकारी प्लीडर के आवेदन पर, जिसकी पूरे सात दिन की लिखित सूचना वादी को दे दी गई हो, न्यायालय यह आदेश दे सकेगा कि वादी को निर्धन व्यक्ति के रूप में वाद लाने के लिए दी गई अनुज्ञा निम्नलिखित दशाओं में प्रत्याह्वत कर ली जाए, अर्थात्‌ :--
(क) यदि वादी वाद के दौरान तंग करने वाले या अनुचित आचरण का दोषी है ;
(ख) यदि यह प्रतीत होता है कि वादी के साधन ऐसे हैं कि '[निर्धन व्यक्ति] के रूप में उसे वाद नहीं करते रहना चाहिए ; अथवा
(ग) यदि वादी ने वाद की विषय-वस्तु के बारे में ऐसा कोई करार किया है जिसके अधीन किसी अन्य व्यक्ति ने ऐसी विषय-वस्तु में कोई हित अभिप्राप्त कर लिया है ।
अ[9क. जिस निर्धन व्यक्ति का प्रतिनिधित्व न हो उसके लिए न्यायालय द्वारा प्लीडर नियत किया जाना--(1) जहां किसी ऐसे व्यक्ति का जिसे निर्धन व्यक्ति के रूप में वाद लाने की अनुज्ञा दी गई है, प्रतिनिधित्व प्लीडर द्वारा नहीं किया जाता है वहां न्यायालय उसके लिए प्लीडर तब नियत कर सकेगा जब मामले की परिस्थितियों में ऐसा किया जाना अपेक्षित हो ।
(2) उच्च न्यायालय राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से निम्नलिखित का उपबन्ध करने के लिए नियम बना सकेगा, अर्थात्‌ :--
(क) उपनियम (1) के अधीन नियत किए जाने वाले प्लीडर के चयन की रीति ;
(ख) न्यायालय द्वारा ऐसे प्लीडरों को दी जाने वाली सुविधाएं ;
(ग) कोई अन्य विषय जो उपनियम (1) के उपबन्धों को प्रभावी करने के लिए नियमों द्वारा अपेक्षित हो या उपबन्धित किया जाए ।]

Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections

📤 WhatsApp पर भेजें✈️ Telegram

SUMI SETU • All Indian laws / सभी कानून • वकील सहायक / Lawyer Assistant