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CPC Order 35 Rule 5 — Agents and tenants may not institute interpleader suits
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) आदेश 35 नियम 5 — अभिकर्ता और अभिधारी अन्तराभिवाची वाद संस्थित नहीं कर सकेंगे
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | O35R5 |
| Chapter / अध्याय | Interpleader |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी आदेश 35 नियम 5 क्या है? / What is CPC Order 35 Rule 5?
Agents and tenants may not institute interpleader suits
Full text (English)
Nothing in this Order shall be deemed to enable agents to sue their principals, or tenants to sue their landlords, for the purpose of compelling them to interplead with any persons other than persons making claim through such principals or landlords.
Illustrations
(a) A deposits a box of jewels with B as his agent. C alleges that the jewels were wrongfully obtained from him by A, and claims them from B. B cannot institute an interpleader-suit against A and C.
(b) A deposits a box of jewels with B as his agent. He then writes to C for the purpose of making the jewels a security for a debt due from himself to C. A afterwards alleges that C’s debt is satisfied, and C alleges the contrary. Both claim the jewels from B. B may institute in interpleader-suit against A and C.
Illustrations
(a) A deposits a box of jewels with B as his agent. C alleges that the jewels were wrongfully obtained from him by A, and claims them from B. B cannot institute an interpleader-suit against A and C.
(b) A deposits a box of jewels with B as his agent. He then writes to C for the purpose of making the jewels a security for a debt due from himself to C. A afterwards alleges that C’s debt is satisfied, and C alleges the contrary. Both claim the jewels from B. B may institute in interpleader-suit against A and C.
पूरा पाठ (हिंदी)
इस आदेश की किसी भी बात के बारे में यह नहीं समझा जाएगा कि वह अभिकर्ताओं को अपने मालिकों पर, या अभिधारियों को अपने भू-स्वामियों पर, इस प्रयोजन से वाद लाने को समर्थ करती है कि वे मालिक या भू-स्वामी ऐसे किन्हीं व्यक्तियों से जो ऐसे मालिकों या भू-स्वामियों से व्युत्पन्न अधिकार के अधीन दावा करने वाले व्यक्तियों से भिन्न हों, अन्तराभिवचन करने के लिए विवश किए जाएं ।
' 929 के अधिनियम सं० 2 की धारा 7 द्वारा नियम 5 के स्थान पर प्रतिस्थापित । 2 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 82 द्वारा (-2-977 से) नियम 5 को उपनियम (1) के रूप में पुन: संख्यांकित किया गया । 3 976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 82 द्वारा (-2-977 से) अन्त:स्थापित ।
दृष्टांत (क) आभूषणों का बक्स अपने अभिकर्ता के रूप में ख के पास क निक्षिप्त करता है । ग का यह अभिकथन है कि आभूषण क ने उससे सदोष अभिप्राप्त किए थे और वह उन्हें ख से लेने के लिए दावा करता है । क और ग के विरुद्ध अन्तराभिवाची वाद ख संस्थित नहीं कर सकता ।
(ख) आभूषण का एक बक्स अपने अभिकर्ता के रूप में ख के पास क निक्षिप्त करता है । तब वह इस प्रयोजन से ग को लिखता है कि ग को जो ऋण उस द्वारा शोध्य है उसकी प्रतिभूति वह उन आभूषणों को बना ले । क तत्पश्चात् यह अभिकथन करता है कि ग के ऋण की तुष्टि कर दी गई है और ग इसके विपरीत अभिकथन करता है । दोनों ख से आभूषण लेने का दावा करते हैं । क और ग के विरुद्ध अन्तराभिवाची वाद ख संस्थित कर सकेगा ।
' 929 के अधिनियम सं० 2 की धारा 7 द्वारा नियम 5 के स्थान पर प्रतिस्थापित । 2 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 82 द्वारा (-2-977 से) नियम 5 को उपनियम (1) के रूप में पुन: संख्यांकित किया गया । 3 976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 82 द्वारा (-2-977 से) अन्त:स्थापित ।
दृष्टांत (क) आभूषणों का बक्स अपने अभिकर्ता के रूप में ख के पास क निक्षिप्त करता है । ग का यह अभिकथन है कि आभूषण क ने उससे सदोष अभिप्राप्त किए थे और वह उन्हें ख से लेने के लिए दावा करता है । क और ग के विरुद्ध अन्तराभिवाची वाद ख संस्थित नहीं कर सकता ।
(ख) आभूषण का एक बक्स अपने अभिकर्ता के रूप में ख के पास क निक्षिप्त करता है । तब वह इस प्रयोजन से ग को लिखता है कि ग को जो ऋण उस द्वारा शोध्य है उसकी प्रतिभूति वह उन आभूषणों को बना ले । क तत्पश्चात् यह अभिकथन करता है कि ग के ऋण की तुष्टि कर दी गई है और ग इसके विपरीत अभिकथन करता है । दोनों ख से आभूषण लेने का दावा करते हैं । क और ग के विरुद्ध अन्तराभिवाची वाद ख संस्थित कर सकेगा ।
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
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