SUMI SETU › Laws / कानून › CPC › Order 41 Rule 21
CPC Order 41 Rule 21 — Re-hearing on application of respondent against whom ex parte decree made
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) आदेश 41 नियम 21 — उस प्रत्यर्थी के आवेदन पर पुन: सुनवाई जिसके विरुद्ध एकपक्षीय डिक्री की गई है
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | O41R21 |
| Chapter / अध्याय | Appeals From Original Decrees |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी आदेश 41 नियम 21 क्या है? / What is CPC Order 41 Rule 21?
Re-hearing on application of respondent against whom ex parte decree made
Full text (English)
Where an appeal is heard ex parte and judgment is pronounced against the respondent, he may apply to the Appellate Court to re-hear the appeal; and, if he satisfies the Court that the notice was not duly served or that he was prevented by sufficient cause from appearing when the appeal was called on for hearing, the Court shall re-hear the appeal on such terms as to costs or otherwise as it thinks fit to impose upon him.
पूरा पाठ (हिंदी)
जहां अपील एकपक्षीय सुनी जाती है और प्रत्यर्थी के विरुद्ध निर्णय सुना दिया जाता है वहां वह अपील न्यायालय से अपील को पुन: सुनने के लिए आवेदन कर सकेगा और
! [976 के अधिनियम सं० 04 की धारा 87 द्वारा (-2-977 से) अन्त:स्थापित ।
2 999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 3] द्वारा (-7-2002 से) नियम 3 का लोप किया गया ।
3 [999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 3] द्वारा (-7-2002 से) नियम 8 का लोप किया गया ।
* [999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 3। द्वारा (-7-2002 से) “या नियम 8” शब्दों का लोप किया गया ।
5 976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 87 द्वारा (-2-977 से) नियम 20 को उसके उपनियम (1) के रूप में पुन: संख्यांकित किया गया ।
यदि वह न्यायालय का समाधान कर देता है कि सूचना की तामील सम्यक् रूप से नहीं की गई थी वह अपील की सुनवाई के लिए पुकार होने पर उपसंजात होने से पर्याप्त हेतुक से निवारित हो गया था तो न्यायालय खर्चे सम्बन्धी या अन्यथा ऐसे निबन्धनों पर जो प्रत्यर्थी पर अधिरोपित करना वह ठीक समझे, उस अपील को पुन: सुनेगा ।
! [976 के अधिनियम सं० 04 की धारा 87 द्वारा (-2-977 से) अन्त:स्थापित ।
2 999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 3] द्वारा (-7-2002 से) नियम 3 का लोप किया गया ।
3 [999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 3] द्वारा (-7-2002 से) नियम 8 का लोप किया गया ।
* [999 के अधिनियम सं ० 46 की धारा 3। द्वारा (-7-2002 से) “या नियम 8” शब्दों का लोप किया गया ।
5 976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 87 द्वारा (-2-977 से) नियम 20 को उसके उपनियम (1) के रूप में पुन: संख्यांकित किया गया ।
यदि वह न्यायालय का समाधान कर देता है कि सूचना की तामील सम्यक् रूप से नहीं की गई थी वह अपील की सुनवाई के लिए पुकार होने पर उपसंजात होने से पर्याप्त हेतुक से निवारित हो गया था तो न्यायालय खर्चे सम्बन्धी या अन्यथा ऐसे निबन्धनों पर जो प्रत्यर्थी पर अधिरोपित करना वह ठीक समझे, उस अपील को पुन: सुनेगा ।
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
📤 WhatsApp पर भेजें✈️ Telegram
SUMI SETU • All Indian laws / सभी कानून • वकील सहायक / Lawyer Assistant