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CPC Order 44 Rule 3 — Inquiry as to whether applicant is an indigent person
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) आदेश 44 नियम 3 — इस प्रश्न के बारे में जांच कि आवेदक निर्धन व्यक्ति है या नहीं
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | O44R3 |
| Chapter / अध्याय | [Appeals By Indigent Persons] |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी आदेश 44 नियम 3 क्या है? / What is CPC Order 44 Rule 3?
Inquiry as to whether applicant is an indigent person
Full text (English)
(1) Where an applicant, referred to in rule 1, was allowed to sue or appeal as an indigent person in the Court from whose decree the appeal is 5. Rule 1 re-numbered as sub-rule (1) by Act 66 of 1956, s. 14. 7. Proviso omitted by Act 66 of 1956, s. 14. preferred, no further inquiry in respect of the question whether or not he is an indigent person shall be necessary if the applicant has made an affidavit stating that he has not ceased to be an indigent person since the date of the decree appealed from; but if the Government Pleader or the respondent disputes the truth of the statement made in such affidavit, an inquiry into the question aforesaid shall be held by the Appellate Court, or, under the orders of the Appellate Court, by an officer of that Court.
(2) Where the applicant, referred to in rule 11, is alleged to have become an indigent person since the date of the decree appealed from, the inquiry into the question whether or not he is an indigent person shall be made by the Appellate Court or, under the orders of the Appellate Court, by an officer of that Court unless the Appellate Court considers it necessary in the circumstances of the case that the inquiry should be held by the Court from whose decision the appeal is preferred.]
(2) Where the applicant, referred to in rule 11, is alleged to have become an indigent person since the date of the decree appealed from, the inquiry into the question whether or not he is an indigent person shall be made by the Appellate Court or, under the orders of the Appellate Court, by an officer of that Court unless the Appellate Court considers it necessary in the circumstances of the case that the inquiry should be held by the Court from whose decision the appeal is preferred.]
पूरा पाठ (हिंदी)
(1) जहां नियम । में निर्दिष्ट आवेदक को उस न्यायालय में जिसकी डिक्री की अपील की गई है, निर्धन व्यक्ति के रूप में वाद लाने या अपील करने के लिए अनुज्ञात किया गया था वहां, यदि आवेदक ने यह कथन करते हुए शपथपत्र दिया है कि वह उस डिक्री की तारीख से जिसकी अपील की गई है, निर्धन व्यक्ति न रहने से परिविरत नहीं हुआ है तो, इस प्रश्न के बारे में कि वह निर्धन व्यक्ति है या नहीं, कोई अतिरिक्त जांच आवश्यक नहीं होगी, किन्तु यदि सरकारी प्लीडर या प्रत्यर्थी ऐसे शपथपत्र में किए गए कथन पर विवाद करता है तो पूर्वोक्त प्रश्न की जांच अपील न्यायालय द्वारा या अपील न्यायालय के आदेशों के अधीन उसी न्यायालय के अधिकारी द्वारा की जाएगी ।
! [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 89 द्वारा (-2-977 से) खण्ड (ख), (ड), (छ), (ज), (ड), (ण), और (फ) का लोप किया गया ।
2 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 89 द्वारा (-2-977 से) अन्त:स्थापित ।
3 976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 90 द्वारा (-2-977 से) “अर्किचन अपीलों” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
4 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 90 द्वारा (-2-977 से) “अर्किंचन के रूप में” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
5 956 के अधिनियम सं ० 66 की धारा 4 द्वारा नियम को उपनियम (1) के रूप में पुन: संख्यांकित किया गया ।
* [976 के अधिनियम सं० 04 की धारा 90 द्वारा (-2-977 से) क्रमश: “अर्किचनों” और “अर्किचन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
7 956 के अधिनियम सं० 66 की धारा 4 द्वारा परन्तुक का लोप किया गया ।
* [956 के अधिनियम सं ० 66 की धारा 4 द्वारा अन्त:स्थापित उपनियम (2) का 976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 90 द्वारा (-2-977 से) लोप किया गया । १ [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 90 द्वारा (-2-977 से) नियम 2 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
(2) जहां नियम । में निर्दिष्ट आवेदक के बारे में यह अभिकथन किया जाता है कि वह उस डिक्री की तारीख से जिसकी अपील की गई है, निर्धन व्यक्ति हो गया है वहां इस प्रश्न की जांच कि वह निर्धन व्यक्ति है या नहीं, अपील न्यायालय द्वारा या अपील न्यायालय के आदेशों के अधीन उसी न्यायालय के अधिकारी द्वारा उस दशा में की जाएगी जिसमें अपील न्यायालय मामले की परिस्थितियों में यह आवश्यक नहीं समझता कि जांच ऐसे न्यायालय द्वारा की जानी चाहिए जिसके विनिश्चय की अपील की गई है ।]
! [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 89 द्वारा (-2-977 से) खण्ड (ख), (ड), (छ), (ज), (ड), (ण), और (फ) का लोप किया गया ।
2 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 89 द्वारा (-2-977 से) अन्त:स्थापित ।
3 976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 90 द्वारा (-2-977 से) “अर्किचन अपीलों” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
4 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 90 द्वारा (-2-977 से) “अर्किंचन के रूप में” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
5 956 के अधिनियम सं ० 66 की धारा 4 द्वारा नियम को उपनियम (1) के रूप में पुन: संख्यांकित किया गया ।
* [976 के अधिनियम सं० 04 की धारा 90 द्वारा (-2-977 से) क्रमश: “अर्किचनों” और “अर्किचन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
7 956 के अधिनियम सं० 66 की धारा 4 द्वारा परन्तुक का लोप किया गया ।
* [956 के अधिनियम सं ० 66 की धारा 4 द्वारा अन्त:स्थापित उपनियम (2) का 976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 90 द्वारा (-2-977 से) लोप किया गया । १ [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 90 द्वारा (-2-977 से) नियम 2 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
(2) जहां नियम । में निर्दिष्ट आवेदक के बारे में यह अभिकथन किया जाता है कि वह उस डिक्री की तारीख से जिसकी अपील की गई है, निर्धन व्यक्ति हो गया है वहां इस प्रश्न की जांच कि वह निर्धन व्यक्ति है या नहीं, अपील न्यायालय द्वारा या अपील न्यायालय के आदेशों के अधीन उसी न्यायालय के अधिकारी द्वारा उस दशा में की जाएगी जिसमें अपील न्यायालय मामले की परिस्थितियों में यह आवश्यक नहीं समझता कि जांच ऐसे न्यायालय द्वारा की जानी चाहिए जिसके विनिश्चय की अपील की गई है ।]
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
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