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BNS Section 116 (IPC 320) — Grievous hurt

भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) धारा 116 (पुरानी आईपीसी 320) — घोर उपहति

Law / कानूनBharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS)
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस)
Section / धारा116
Chapter / अध्यायChapter VI — Of Offences Affecting The Human Body
Old law / पुरानी धाराIndian Penal Code (IPC) — IPC 320
Punishment / सज़ासज़ा धारा 117 में

सरल हिंदी सार

घोर उपहति
केवल इन चोटों को घोर उपहति कहा गया है: पुंसत्वहरण, एक या दोनों आँखों की रोशनी का स्थायी नाश, कान की सुनने की शक्ति का स्थायी नाश, किसी अंग या जोड़ का नाश, अंग की शक्ति का स्थायी क्षय, सिर या चेहरे का स्थायी विद्रूपण, हड्डी या दाँत का टूटना/उखड़ना, और ऐसी चोट जो प्राण के लिए संकट हो या 15 दिन तक तीव्र पीड़ा या सामान्य काम से असमर्थता दे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बीएनएस धारा 116 क्या है? / What is BNS Section 116?
Grievous hurt — घोर उपहति: केवल इन चोटों को घोर उपहति कहा गया है: पुंसत्वहरण, एक या दोनों आँखों की रोशनी का स्थायी नाश, कान की सुनने की शक्ति का स्थायी नाश, किसी अंग या जोड़ का नाश, अंग की शक्ति का स्थायी क्षय, सिर या चेहरे का स्थायी विद्रूपण, हड्डी या दाँत का टूटना/उखड़ना, और ऐसी चोट जो प्राण के लिए संकट हो या 15 दिन तक तीव्र पीड़ा या सामान्य काम से असमर्थता दे।

बीएनएस धारा 116 पुरानी आईपीसी की कौन-सी धारा है? / Which old IPC section is BNS Section 116?
BNS Section 116 = IPC 320. Grievous hurt

बीएनएस धारा 116 की सज़ा क्या है? / What is the punishment under BNS Section 116?
सज़ा धारा 117 में

Full text (English)

The following kinds of hurt only are designated as “grievous”, namely:—
(a) Emasculation;
(b) Permanent privation of the sight of either eye;
(c) Permanent privation of the hearing of either ear;
(d) Privation of any member or joint;
(e) Destruction or permanent impairing of the powers of any member or joint;
(f) Permanent disfiguration of the head or face;
(g) Fracture or dislocation of a bone or tooth;
(h) Any hurt which endangers life or which causes the sufferer to be during the space of fifteen days in severe bodily pain, or unable to follow his ordinary pursuits.

पूरा पाठ (हिंदी)

केवल निम्नलिखित उपहति को “घोर उपहति” के रूप मे निर्दिष्ट किया गया है, अर्थात्‌ :--
(ख) दोनों में से किसी भी नेत्र की दृष्टि का स्थायी विच्छेद ;
(ग) दोनों में से किसी भी कान की श्रवणशक्ति का स्थायी विच्छेद ; (घ) किसी भी अंग या जोड़ का विच्छेद ;
(ड) किसी भी अंग या जोड़ की शक्तियों का नाश या स्थायी हास ; (च) सिर या चेहरे का स्थायी विद्रूपीकरण ;
(छ) अस्थि या दांत का भंग या विसंधान ;
(ज) कोई उपहति जो जीवन को संकट में डालती है या जिसके कारण उपहत व्यक्ति पंद्रह दिन तक तीव्र शारीरिक पीड़ा में रहता है या अपने सामान्य कामकाज को करने में असमर्थ रहता है ।
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Source: India Code — The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (As on 6 Oct 2025). All BNS sections

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