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BNS Section 198 (IPC 166) — Public servant disobeying law, with intent to cause injury to any person
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) धारा 198 (पुरानी आईपीसी 166)
| Law / कानून | Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) |
|---|---|
| Section / धारा | 198 |
| Chapter / अध्याय | Chapter XII — Of Offences By Or Relating To Public Servants |
| Old law / पुरानी धारा | Indian Penal Code (IPC) — IPC 166 |
संज्ञेय, ज़मानती और विचारण (BNSS प्रथम अनुसूची)
| उप-धारा / Clause | संज्ञेय? | ज़मानती? | विचारण / Triable by |
|---|---|---|---|
| 198 | असंज्ञेय Non-cognizable | ज़मानती Bailable | प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट Magistrate of the first class |
स्रोत: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की प्रथम अनुसूची।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
BNS धारा 198 क्या है? / What is BNS Section 198?
Public servant disobeying law, with intent to cause injury to any person
क्या BNS धारा 198 ज़मानती है? / Is BNS Section 198 bailable?
यह अपराध: ज़मानती (Bailable)
क्या BNS धारा 198 संज्ञेय है? / Is BNS Section 198 cognizable?
यह अपराध: असंज्ञेय (Non-cognizable)
BNS धारा 198 का विचारण कौन-सा न्यायालय करता है? / Which court tries BNS Section 198?
विचारण: प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Magistrate of the first class)
बीएनएस धारा 198 पुरानी आईपीसी की कौन-सी धारा है? / Which old IPC section is BNS Section 198?
BNS Section 198 = IPC 166. Public servant disobeying law, with intent to cause injury to any person
Full text (English)
Illustration. In A, being an officer directed by law to take property in execution, in order to satisfy a decree pronounced in Z’s favour by a Court, knowingly disobeys that direction of law, with the knowledge that he is likely thereby to cause injury to Z. A has committed the offence defined in this section.
पूरा पाठ (हिंदी)
दृष्टांत क, जो एक अधिकारी है, और न्यायालय द्वारा य के पक्ष में दी गई डिक्री की तुष्टि के लिए निष्पादन में सम्पत्ति लेने के लिए विधि द्वारा निदेशित है, यह ज्ञान रखते हुए कि यह सम्भाव्य है कि उसके द्वारा वह य को क्षति कारित करेगा, जानते हुए विधि के उस निदेश की अवज्ञा करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है । 99. जो कोई, लोक सेवक होते हुए,--
(क) विधि के किसी ऐसे निदेश की, जो उसको किसी अपराध या किसी अन्य मामले में अन्वेषण के प्रयोजन के लिए, किसी व्यक्ति को किसी स्थान पर उपस्थिति की अपेक्षा किए जाने से प्रतिषिदूध करता है, जानते हुए अवज्ञा करता है ; या
(ख) किसी ऐसी रीति को, जिसमें वह ऐसा अन्वेषण करेगा, विनियमित करने वाली विधि के किसी अन्य निदेश की, किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए, जानते हुए अवज्ञा करता है ; या
(ग) धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 70, धारा 7।, धारा 74, धारा 76, धारा 77, धारा 79, धारा क24, धारा 443 या धारा 44 के अधीन दंडनीय संज्ञेय अपराध के संबंध में उसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 73 की उपधारा (1) के अधीन दी गई किसी सूचना को लेखबदूध करने में असफल रहता है,
तो वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी, किंतु जो दो वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
Source: India Code — The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (As on 6 Oct 2025). All BNS sections
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