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BNSS Section 263 (CrPC 240) — Framing of charge
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) धारा 263 (पुरानी सीआरपीसी 240) — आरोप निर्धारित करना (वारंट-मामला)
| Law / कानून | Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) |
|---|---|
| Section / धारा | 263 |
| Chapter / अध्याय | Chapter XX — Trial Of Warrant-Cases By Magistrates |
| Old law / पुरानी धारा | Code of Criminal Procedure (CrPC) — CrPC 240 |
सरल हिंदी सार
आरोप निर्धारित करना (वारंट-मामला)
आरोप निराधार न लगने पर मजिस्ट्रेट आरोप निर्धारित करता है, उसे अभियुक्त को पढ़कर सुनाता है और पूछता है कि वह दोष स्वीकार करता है या विचारण चाहता है।
आरोप निराधार न लगने पर मजिस्ट्रेट आरोप निर्धारित करता है, उसे अभियुक्त को पढ़कर सुनाता है और पूछता है कि वह दोष स्वीकार करता है या विचारण चाहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बीएनएसएस धारा 263 क्या है? / What is BNSS Section 263?
Framing of charge — आरोप निर्धारित करना (वारंट-मामला): आरोप निराधार न लगने पर मजिस्ट्रेट आरोप निर्धारित करता है, उसे अभियुक्त को पढ़कर सुनाता है और पूछता है कि वह दोष स्वीकार करता है या विचारण चाहता है।
बीएनएसएस धारा 263 पुरानी सीआरपीसी की कौन-सी धारा है? / Which old CrPC section is BNSS Section 263?
BNSS Section 263 = CrPC 240. Framing of charge
Full text (English)
(1) If, upon such consideration, examination, if any, and hearing, the Magistrate is of opinion that there is ground for presuming that the accused has committed an offence triable under this Chapter, which such Magistrate is competent to try and which, in his opinion, could be adequately punished by him, he shall frame in writing a charge against the accused within a period of sixty days from the date of first hearing on charge.
(2) The charge shall then be read and explained to the accused, and he shall be asked whether he pleads guilty of the offence charged or claims to be tried.
(2) The charge shall then be read and explained to the accused, and he shall be asked whether he pleads guilty of the offence charged or claims to be tried.
पूरा पाठ (हिंदी)
(1) यदि... ऐसे विचार, परीक्षा, यदि कोई हो, और सुनवाई कर लेने पर मजिस्ट्रेट की यह राय है कि ऐसी उपधारणा करने का आधार है कि अभियुक्त ने इस मजिस्ट्रेट सक्षम है और जो उसकी राय में उसके द्वारा पर्याप्त रूप से दंडित किया जा सकता है तो वह अभियुक्त के विरुद्ध आरोप की पहली सुनवाई की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर लिखित रूप में विरचित करेगा ।
(2) तब वह आरोप अभियुक्त को पढ़ कर सुनाया और समझाया जाएगा और उससे यह पूछा जाएगा कि क्या वह उस अपराध का, जिसका आरोप लगाया गया है दोषी होने का अभिवाक् करता है या विचारण किए जाने का दावा करता है ।
🔎 सरल सार, केस-लॉ और बोलकर/फ़ोटो से धारा खोजें(2) तब वह आरोप अभियुक्त को पढ़ कर सुनाया और समझाया जाएगा और उससे यह पूछा जाएगा कि क्या वह उस अपराध का, जिसका आरोप लगाया गया है दोषी होने का अभिवाक् करता है या विचारण किए जाने का दावा करता है ।
Source: India Code — The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023. All BNSS sections
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