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BNSS Section 329 (CrPC 293) — Reports of certain Government scientific experts

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) धारा 329 (पुरानी सीआरपीसी 293)

Law / कानूनBharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS)
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस)
Section / धारा329
Chapter / अध्यायChapter XXV — Evidence In Inquiries And Trials
Old law / पुरानी धाराCode of Criminal Procedure (CrPC) — CrPC 293

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बीएनएसएस धारा 329 क्या है? / What is BNSS Section 329?
Reports of certain Government scientific experts

बीएनएसएस धारा 329 पुरानी सीआरपीसी की कौन-सी धारा है? / Which old CrPC section is BNSS Section 329?
BNSS Section 329 = CrPC 293. Reports of certain Government scientific experts

Full text (English)

(1) Any document purporting to be a report under the hand of a Government scientific expert to whom this section applies, upon any matter or thing duly submitted to him for examination or analysis and report in the course of any proceeding under this Sanhita, may be used as evidence in any inquiry, trial or other proceeding under this Sanhita.
(2) The Court may, if it thinks fit, summon and examine any such expert as to the subject-matter of his report.
(3) Where any such expert is summoned by a Court, and he is unable to attend personally, he may, unless the Court has expressly directed him to appear personally, depute any responsible officer working with him to attend the Court, if such officer is conversant with the facts of the case and can satisfactorily depose in Court on his behalf.
(4) This section applies to the following Government scientific experts, namely:—
(b) the Chief Controller of Explosives;
(c) the Director of the Finger Print Bureau;
(a) any Chemical Examiner or Assistant Chemical Examiner to Government;
(d) the Director, Haffkeine Institute, Bombay;
(e) the Director, Deputy Director or Assistant Director of a Central Forensic Science Laboratory or a State Forensic Science Laboratory;
(f) the Serologist to the Government;
(g) any other scientific expert specified or certified, by notification, by the State Government or the Central Government for this purpose.

पूरा पाठ (हिंदी)

(1) कोई दस्तावेज, जो किसी सरकारी वैज्ञानिक विशेषज्ञ की, जिसे यह धारा लागू होती है, इस संहिता के अधीन किसी कार्यवाही के दौरान परीक्षा या विश्लेषण और रिपोर्ट के लिए सम्यक्‌ रूप से उसे भेजी गई किसी सामग्री या चीज के बारे में स्वहस्ताक्षरित रिपोर्ट होनी तात्पर्यित है, इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के तौर पर उपयोग में लाई जा सकेगी ।
(2) यदि न्यायालय ठीक समझता है तो वह ऐसे विशेषज्ञ को समन कर सकता है और उसकी रिपोर्ट की विषयवस्तु के बारे में उसकी परीक्षा कर सकेगा ।
(3) जहां ऐसे किसी विशेषज्ञ को न्यायालय द्वारा समन किया जाता है और वह स्वयं उपस्थित होने में असमर्थ है वहां, उस दशा के सिवाय जिसमें न्यायालय ने उसे स्वयं उपस्थित होने के लिए स्पष्ट रूप से निदेश दिया है, वह अपने साथ काम करने वाले किसी उत्तरदायी अधिकारी को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए प्रतिनियुक्त कर सकेगा, यदि वह अधिकारी मामले के तथ्यों से अवगत है तथा न्यायालय में उसकी ओर से समाधानप्रद रूप में अभिसाक्ष्य दे सकता है ।
(4) यह धारा निम्नलिखित सरकारी वैज्ञानिक विशेषज्ञों को लागू होती है, अर्थात्‌ :--
सरकार का कोई रासायनिक परीक्षक या सहायक रासायनिक परीक्षक ;
निदेशक, हाफकीन संस्थान, मुम्बई ; (ड) किसी केन्द्रीय न्यायालयिक प्रयोगशाला या किसी राज्य न्यायालयिक प्रयोगशाला का निदेशक, उप-निदेशक या सहायक निदेशक ; (च) सरकारी सीरम विज्ञानी ; (छ) कोई अन्य वैज्ञानिक विशेषज्ञ, जो इस प्रयोजन के लिए राज्य सरकार या केन्द्रीय सरकार द्वारा, अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट या प्रमाणित किया गया हो । 330. (1) जहां अभियोजन या अभियुक्त द्वारा किसी न्यायालय के समक्ष कोई दस्तावेज फाइल किया गया है वहां ऐसे प्रत्येक दस्तावेज की विशिष्टियां एक सूची में सम्मिलित की जाएंगी और अभियोजन या अभियुक्त या अभियोजन या अभियुक्त के अधिवक्ता से, यदि कोई हों, ऐसे दस्तावेजों की पूर्ति करने के शीघ्र पश्चात्‌ किसी भी दशा में ऐसी पूर्ति के पश्चात्‌ तीस दिन के अपश्चात्‌, ऐसे प्रत्येक दस्तावेज का असली होना स्वीकार या इंकार करने की अपेक्षा की जाएगी: परंतु न्यायालय अपने विवेक से ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएं, समय सीमा को शिथिल कर सकेगा: परंतु यह और कि किसी विशेषज्ञ को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए जब तक नहीं बुलाया जाएगा तब तक ऐसे विशेषज्ञ की रिपोर्ट पर विचारण के किसी पक्षकार द्वारा विवाद नहीं किया जाता है । (2) दस्तावेजों की सूची ऐसे प्ररूप में होगी जो राज्य सरकार नियमों द्वारा उपबंधित करे ।
(3) जहां किसी दस्तावेज का असली होना विवादग्रस्त नहीं है वहां ऐसा दस्तावेज
उस व्यक्ति के जिसके द्वारा उसका हस्ताक्षरित होना तात्पर्यित है, हस्ताक्षर के सबूत के बिना इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य में पढ़ा जा सकेगा :
परन्तु न्यायालय, स्वविवेकानुसार, यह अपेक्षा कर सकता है कि ऐसा हस्ताक्षर साबित किया जाए ।
33... जब किसी न्यायालय में इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही के दौरान कोई आवेदन किया जाता है और उसमें किसी लोक सेवक के बारे में अभिकथन किए जाते हैं तब आवेदक, आवेदन में अभिकथित तथ्यों का शपथपत्र द्वारा साक्ष्य दे सकेगा और न्यायालय यदि ठीक समझे तो वह आदेश दे सकेगा कि ऐसे तथ्यों से संबंधित साक्ष्य इस प्रकार दिया जाए ।
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Source: India Code — The Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023. All BNSS sections

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