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BSA Section 105 (Evidence Act 102) — On whom burden of proof lies
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) धारा 105 (पुरानी साक्ष्य अधिनियम 102) — सबूत का भार किस पर
| Law / कानून | Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 (BSA) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) |
|---|---|
| Section / धारा | 105 |
| Chapter / अध्याय | Chapter VII — Of The Burden Of Proof |
| Old law / पुरानी धारा | Indian Evidence Act, 1872 — Evidence Act 102 |
सरल हिंदी सार
सबूत का भार किस पर
जो पक्ष कोई साक्ष्य न देने पर मुक़दमा हार जाएगा, उसी पर सबूत का भार होता है।
जो पक्ष कोई साक्ष्य न देने पर मुक़दमा हार जाएगा, उसी पर सबूत का भार होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बीएसए धारा 105 क्या है? / What is BSA Section 105?
On whom burden of proof lies — सबूत का भार किस पर: जो पक्ष कोई साक्ष्य न देने पर मुक़दमा हार जाएगा, उसी पर सबूत का भार होता है।
बीएसए धारा 105 पुरानी साक्ष्य अधिनियम की कौन-सी धारा है? / Which old Evidence Act section is BSA Section 105?
BSA Section 105 = Evidence Act 102. On whom burden of proof lies
Full text (English)
The burden of proof in a suit or proceeding lies on that person who would fail if no evidence at all were given on either side.
Illustrations.
(a) A sues B for land of which B is in possession, and which, as A asserts, was left to A by the will of C, B's father. If no evidence were given on either side, B would be entitled to retain his possession. Therefore, the burden of proof is on A.
(b) A sues B for money due on a bond. The execution of the bond is admitted, but B says that it was obtained by fraud, which A denies. If no evidence were given on either side, A would succeed, as the bond is not disputed and the fraud is not proved. Therefore, the burden of proof is on B.
Illustrations.
(a) A sues B for land of which B is in possession, and which, as A asserts, was left to A by the will of C, B's father. If no evidence were given on either side, B would be entitled to retain his possession. Therefore, the burden of proof is on A.
(b) A sues B for money due on a bond. The execution of the bond is admitted, but B says that it was obtained by fraud, which A denies. If no evidence were given on either side, A would succeed, as the bond is not disputed and the fraud is not proved. Therefore, the burden of proof is on B.
पूरा पाठ (हिंदी)
किसी वाद या कार्यवाही में सबूत का भार उस व्यक्ति पर होता है जो असफल हो जाएगा, यदि दोनों में से किसी भी ओर से कोई भी साक्ष्य न दिया जाए ।
(क) ख पर उस भूमि के लिए क वाद लाता है जो ख के कब्जे में है और जिसके बारे में क दृ़कथन करता है कि वह ख के पिता ग को वसीयत द्वारा क के लिए दी गई थी । यदि किसी भी ओर से कोई साक्ष्य नहीं दिया जाए, तो ख इसका हकदार होगा कि वह अपना कब्जा रखे रहे । अत: सबूत का भार क पर है ।
(ख) ख पर एक बन्धपत्र पर देय धन के लिए क वाद लाता है । उस बन्धपत्र का निष्पादन स्वीकृत है किन्तु ख कहता है कि वह कपट द्वारा अभिप्राप्त किया गया था, जिस बात का क इंकार करता है । यदि दोनों में से किसी भी ओर से कोई साक्ष्य नहीं
दिया जाए, तो क सफल होगा क्योंकि बन्धपत्र विवादग्रस्त नहीं है और कपट साबित नहीं किया गया । अतः: सबूत का भार ख पर है ।
🔎 सरल सार, केस-लॉ और बोलकर/फ़ोटो से धारा खोजें(क) ख पर उस भूमि के लिए क वाद लाता है जो ख के कब्जे में है और जिसके बारे में क दृ़कथन करता है कि वह ख के पिता ग को वसीयत द्वारा क के लिए दी गई थी । यदि किसी भी ओर से कोई साक्ष्य नहीं दिया जाए, तो ख इसका हकदार होगा कि वह अपना कब्जा रखे रहे । अत: सबूत का भार क पर है ।
(ख) ख पर एक बन्धपत्र पर देय धन के लिए क वाद लाता है । उस बन्धपत्र का निष्पादन स्वीकृत है किन्तु ख कहता है कि वह कपट द्वारा अभिप्राप्त किया गया था, जिस बात का क इंकार करता है । यदि दोनों में से किसी भी ओर से कोई साक्ष्य नहीं
दिया जाए, तो क सफल होगा क्योंकि बन्धपत्र विवादग्रस्त नहीं है और कपट साबित नहीं किया गया । अतः: सबूत का भार ख पर है ।
Source: India Code — The Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 (As on 6 Oct 2025). All BSA sections
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