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Article 134 — Appellate jurisdiction of the Supreme Court in regard to criminal matters
भारत का संविधान अनुच्छेद 134
| Law / कानून | Constitution of India भारत का संविधान |
|---|---|
| Article / अनुच्छेद | 134 |
| Chapter / अध्याय | Part IVA — Fundamental Duties |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
संविधान अनुच्छेद 134 क्या है? / What is Article 134?
Appellate jurisdiction of the Supreme Court in regard to criminal matters
Full text (English)
(1) An appeal shall lie to the Supreme Court from any judgment, final order or sentence in a criminal proceeding of a High Court in the territory of India if the High Court—
(a) has on appeal reversed an order of acquittal of an accused person and sentenced him to death; or
(b) has withdrawn for trial before itself any case from any court subordinate to its authority and has in such trial convicted the accused person and sentenced him to death; or
(c) 5[certifies under article 134A] that the case is a fit one for appeal to the Supreme Court: the High Court certifies" (w.e.f. 1-8-1979). (w.e.f. 27-2-1973). Court certifies.—" (w.e.f. 1-8-1979). THE CONSTITUTION OF INDIA (Part V.—The Union)
Provided that an appeal under sub-clause (c) shall lie subject to such provisions as may be made in that behalf under clause (1) of article 145 and to such conditions as the High Court may establish or require.
(2) Parliament may by law confer on the Supreme Court any further powers to entertain and hear appeals from any judgment, final order or sentence in a criminal proceeding of a High Court in the territory of India subject to such conditions and limitations as may be specified in such law.
(a) has on appeal reversed an order of acquittal of an accused person and sentenced him to death; or
(b) has withdrawn for trial before itself any case from any court subordinate to its authority and has in such trial convicted the accused person and sentenced him to death; or
(c) 5[certifies under article 134A] that the case is a fit one for appeal to the Supreme Court: the High Court certifies" (w.e.f. 1-8-1979). (w.e.f. 27-2-1973). Court certifies.—" (w.e.f. 1-8-1979). THE CONSTITUTION OF INDIA (Part V.—The Union)
Provided that an appeal under sub-clause (c) shall lie subject to such provisions as may be made in that behalf under clause (1) of article 145 and to such conditions as the High Court may establish or require.
(2) Parliament may by law confer on the Supreme Court any further powers to entertain and hear appeals from any judgment, final order or sentence in a criminal proceeding of a High Court in the territory of India subject to such conditions and limitations as may be specified in such law.
पूरा पाठ (हिंदी)
.दांडिक विषयों में उच्चतम न्यायालय की . अपीली. अधिकारिता न ) भारत के राज्यक्षेत्र में किसी उच्च न्यायालय की दांडिक कार्यवाही में दिए गए निर्णय, अंतिम आदेश या दंडादेश की अपील उच्चतम न्यायालय में होगी यदि:
क) उस उच्च न्यायालय ने अपील में किसी अभियक्त व्यक्ति की दोषमक्ति के आदेश को उलट दिया है और उसको मृत्यु दंडादेश दिया है; या
(ख) उस उच्च न्यायालय ने अपने प्राधिकार _ के अधीनस्थ किसी न्यायालय से किसी मामले को विचारण के लिए अपने पास मंगा लिया है और ऐसे विचारण में अभियुक्त व्यक्ति को सिद्धदोष ठहराया है और उसको मृत्यु दंडादेश दिया है; या
(ग) वह उच्च न्यायालय “[अनच्छेद, 34क के अधीन प्रमाणित कर देता है कि मामला उच्चतम न्यायालय में अपील किए जाने योग्य है
. संविधान (चवाललीसवां संशोधन) अधिनियम, 978 की धारा 7 द्वारा (-8-4979 से) “यदि उच्च न्यायालय प्रमाणित करता है” खंड (2) का लोप किया गया ।
2. संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 978 की धारा 7 द्वारा (-8-979 से) कुछ शब्दों का लोप किया गया ।
3. संविधान (तीसवां संशोधन) अधिनियम, 972 की धारा 2 द्वारा (27-2-4973 से) खंड (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
4. संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 978 की धारा 8 द्वारा (-8-979 से) “यदि उच्च न्यायालय प्रमाणित करे” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
5. संविधान (चवाबीसवां संशोधन) अधिनियम, 978 की धारा 49 द्वारा (।-8-4979 से) “प्रमाणित करता है” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
भारत का संविधान 3 (भाग 5--संघ)
परन्त उपखंड (ग) के अधीन अपील ऐसे उपबंधों के अधीन रहते हुए होगी जो अनच्छेद 45 के खंड (1) के अधीन इस निमित्त बनाए जाएं और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए होगी जो उच्च न्यायालय नियत या अपेक्षित करे ।
(2) संसद् विधि द्वारा उच्चतम न्यायालय को भारत के राज्यक्षेत्र में किसी उच्च न्यायालय की दांडिक कार्यवाही में दिए गए किसी निर्णय, अंतिम आदेश या दंडादेश की अपील ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हए, जो. ऐसी विधि में विनिर्दिष्ट की जाएं, ग्रहण करने और सुनने की अतिरिक्त शक्ति दें सकेगी ।
[34क. उच्चतम न्यायालय में अपील के लिए प्रमाणपत्र-प्रत्येक उच्च न्यायालय, जो अनुच्छेद 32 के खंड (1) या अनच्छेद 33 के खंड (1) या अनच्छेद 34 के खंड मैं निर्दिष्ट निर्णय, डिक्री, अंतिम आदेश या दंडादेश पारित करता है या देता है, इस प्रकार पारित किए जाने या दिए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, इस प्रश्न का अवधारण कि उस मामले के संबंध में, यथास्थिति, अन॒च्छेद 32 के खंड (1) या अनच्छेद 33 के खंड (1) या अनुच्छेद 34 के खंड (1) के उपखंड (ग) में निर्दिष्ट प्रकृति का प्रमाणपत्र दिया जाए या नहीं, -- (क) यदि वह ऐसा करना ठीक समझता है तो स्वप्रेरणा से कर सकेगा; और (ख) यदि ऐसा निर्णय, डिक्री, अंतिम आदेश या दंडादेश पारित किए जाने या दिए जाने के ठीक पश्चात् व्यथित पक्षकार द्वारा या उसकी ओर से मौखिक आवेदन किया जाता है तो करेगा ।]
क) उस उच्च न्यायालय ने अपील में किसी अभियक्त व्यक्ति की दोषमक्ति के आदेश को उलट दिया है और उसको मृत्यु दंडादेश दिया है; या
(ख) उस उच्च न्यायालय ने अपने प्राधिकार _ के अधीनस्थ किसी न्यायालय से किसी मामले को विचारण के लिए अपने पास मंगा लिया है और ऐसे विचारण में अभियुक्त व्यक्ति को सिद्धदोष ठहराया है और उसको मृत्यु दंडादेश दिया है; या
(ग) वह उच्च न्यायालय “[अनच्छेद, 34क के अधीन प्रमाणित कर देता है कि मामला उच्चतम न्यायालय में अपील किए जाने योग्य है
. संविधान (चवाललीसवां संशोधन) अधिनियम, 978 की धारा 7 द्वारा (-8-4979 से) “यदि उच्च न्यायालय प्रमाणित करता है” खंड (2) का लोप किया गया ।
2. संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 978 की धारा 7 द्वारा (-8-979 से) कुछ शब्दों का लोप किया गया ।
3. संविधान (तीसवां संशोधन) अधिनियम, 972 की धारा 2 द्वारा (27-2-4973 से) खंड (1) के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
4. संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 978 की धारा 8 द्वारा (-8-979 से) “यदि उच्च न्यायालय प्रमाणित करे” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
5. संविधान (चवाबीसवां संशोधन) अधिनियम, 978 की धारा 49 द्वारा (।-8-4979 से) “प्रमाणित करता है” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
भारत का संविधान 3 (भाग 5--संघ)
परन्त उपखंड (ग) के अधीन अपील ऐसे उपबंधों के अधीन रहते हुए होगी जो अनच्छेद 45 के खंड (1) के अधीन इस निमित्त बनाए जाएं और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए होगी जो उच्च न्यायालय नियत या अपेक्षित करे ।
(2) संसद् विधि द्वारा उच्चतम न्यायालय को भारत के राज्यक्षेत्र में किसी उच्च न्यायालय की दांडिक कार्यवाही में दिए गए किसी निर्णय, अंतिम आदेश या दंडादेश की अपील ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हए, जो. ऐसी विधि में विनिर्दिष्ट की जाएं, ग्रहण करने और सुनने की अतिरिक्त शक्ति दें सकेगी ।
[34क. उच्चतम न्यायालय में अपील के लिए प्रमाणपत्र-प्रत्येक उच्च न्यायालय, जो अनुच्छेद 32 के खंड (1) या अनच्छेद 33 के खंड (1) या अनच्छेद 34 के खंड मैं निर्दिष्ट निर्णय, डिक्री, अंतिम आदेश या दंडादेश पारित करता है या देता है, इस प्रकार पारित किए जाने या दिए जाने के पश्चात् यथाशक्य शीघ्र, इस प्रश्न का अवधारण कि उस मामले के संबंध में, यथास्थिति, अन॒च्छेद 32 के खंड (1) या अनच्छेद 33 के खंड (1) या अनुच्छेद 34 के खंड (1) के उपखंड (ग) में निर्दिष्ट प्रकृति का प्रमाणपत्र दिया जाए या नहीं, -- (क) यदि वह ऐसा करना ठीक समझता है तो स्वप्रेरणा से कर सकेगा; और (ख) यदि ऐसा निर्णय, डिक्री, अंतिम आदेश या दंडादेश पारित किए जाने या दिए जाने के ठीक पश्चात् व्यथित पक्षकार द्वारा या उसकी ओर से मौखिक आवेदन किया जाता है तो करेगा ।]
Source: India Code — The Constitution of India (As on 10 Sep 2026). All Constitution articles
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