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Article 21 — Protection of life and personal liberty

भारत का संविधान अनुच्छेद 21 — प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण

Law / कानूनConstitution of India
भारत का संविधान
Article / अनुच्छेद21
Chapter / अध्यायPart III — Fundamental Rights

सरल हिंदी सार

प्राण और दैहिक स्वतंत्रता
किसी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा। मेनका गांधी के बाद इसमें गरिमा से जीवन, निजता, शीघ्र विचारण, निःशुल्क विधिक सहायता जैसे अधिकार शामिल माने गए।

मुख्य तत्व / Key ingredients

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

संविधान अनुच्छेद 21 क्या है? / What is Article 21?
Protection of life and personal liberty — प्राण और दैहिक स्वतंत्रता: किसी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा। मेनका गांधी के बाद इसमें गरिमा से जीवन, निजता, शीघ्र विचारण, निःशुल्क विधिक सहायता जैसे अधिकार शामिल माने गए।

Full text (English)

No person shall be deprived of his life or personal liberty except according to procedure established by law.

पूरा पाठ (हिंदी)

किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

प्रमुख निर्णय / Landmark judgments

Maneka Gandhi v. Union of India — सर्वोच्च न्यायालय, 1978, (1978) 1 SCC 248
अनुच्छेद 21 की 'प्रक्रिया' मनमानी नहीं हो सकती — उसे न्यायसंगत, उचित और युक्तियुक्त होना चाहिए; अनुच्छेद 14, 19 और 21 परस्पर जुड़े हैं।
Olga Tellis v. Bombay Municipal Corporation — सर्वोच्च न्यायालय, 1985, (1985) 3 SCC 545
जीविका का अधिकार जीवन के अधिकार का हिस्सा है; बेदख़ली से पहले उचित प्रक्रिया ज़रूरी।
Justice K.S. Puttaswamy v. Union of India — सर्वोच्च न्यायालय (9 न्यायाधीश), 2017, (2017) 10 SCC 1
निजता का अधिकार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मूल अधिकार है।

Source: India Code — The Constitution of India (As on 10 Sep 2026). All Constitution articles

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