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CPC Order 18 Rule 15 — Power to deal with evidence taken before another Judge
सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) आदेश 18 नियम 15 — किसी अन्य न्यायाधीश के सामने लिए गए साक्ष्य का उपयोग करने की शक्ति
| Law / कानून | Code of Civil Procedure, 1908 (CPC) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (सीपीसी) |
|---|---|
| Section / धारा | O18R15 |
| Chapter / अध्याय | Hearing Of The Suit And Examination Of Witnesses |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सीपीसी आदेश 18 नियम 15 क्या है? / What is CPC Order 18 Rule 15?
Power to deal with evidence taken before another Judge
Full text (English)
(1) Where a Judge is prevented by death, transfer or other cause from concluding the trial of a suit, his successor may deal with any evidence or memorandum taken down or made under the foregoing rules as if such evidence or memorandum had been taken down or made by him or under his direction under the said rules and may proceed with the suit from the stage at which his predecessor left it.
(2) The provisions of sub-rule (1) shall, so far as they are applicable, be deemed to apply to evidence taken in a suit transferred under section 24.
(2) The provisions of sub-rule (1) shall, so far as they are applicable, be deemed to apply to evidence taken in a suit transferred under section 24.
पूरा पाठ (हिंदी)
(1) जहां मृत्यु, स्थानान्तरण या अन्य कारण से न्यायाधीश वाद के विचारण की समाप्ति करने से निवारित हो जाता है वहां उसका उत्तरवर्ती, पूर्वगामी नियमों के अधीन लिए गए किसी भी साक्ष्य या बनाए गए किसी भी ज्ञापन का उसी प्रकार उपयोग कर सकेगा मानो ऐसा साक्ष्य या ज्ञापन उक्त नियमों
' नियम 6, 7, 8, 9, , 3, 4 और 5 के उपबंध, जहां तक वे साक्ष्य लेने की रीति से संबंधित हैं, अवध के मुख्य न्यायालय को लागू नहीं होते हैं देखिए अवध कोर्ट्स ऐक्ट, 925 (925 का यू ०पी ० अधिनियम सं ० 4) की धारा 6 (2) ।
2 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 69 द्वारा (-2-977 से) अन्तःस्थापित ।
3 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 69 द्वारा (-2-977 से) नियम 9 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
* नियम 6, 7, 8, 9, , 3, 4 और 5 के उपबंध, जहां तक वे साक्ष्य लेने की रीति से संबंधित हैं, अवध के मुख्य न्यायालय को लागू नहीं होते हैं देखिए अवध कोर्ट्स ऐक्ट, 925 (925 का यू ०पी ० अधिनियम सं ० 4) की धारा 6 (2) ।
5 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 69 द्वारा (-2-977 से) पूर्ववर्ती नियम के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
के अधीन उसी के द्वारा या उसके निदेश के अधीन लिया गया था या बनाया गया था, और वह वाद में उस प्रक्रम से अग्रसर हो सकेगा जिसमें उसे उसके पूर्ववर्ती ने छोड़ा था ।
(2) उपनियम (1) के उपबन्ध धारा 24 के अधीन अन्तरित वाद में लिए गए साक्ष्य को वहां तक लागू समझे जाएंगे जहां तक वे लायू किए जा सकते हैं ।
' नियम 6, 7, 8, 9, , 3, 4 और 5 के उपबंध, जहां तक वे साक्ष्य लेने की रीति से संबंधित हैं, अवध के मुख्य न्यायालय को लागू नहीं होते हैं देखिए अवध कोर्ट्स ऐक्ट, 925 (925 का यू ०पी ० अधिनियम सं ० 4) की धारा 6 (2) ।
2 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 69 द्वारा (-2-977 से) अन्तःस्थापित ।
3 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 69 द्वारा (-2-977 से) नियम 9 के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
* नियम 6, 7, 8, 9, , 3, 4 और 5 के उपबंध, जहां तक वे साक्ष्य लेने की रीति से संबंधित हैं, अवध के मुख्य न्यायालय को लागू नहीं होते हैं देखिए अवध कोर्ट्स ऐक्ट, 925 (925 का यू ०पी ० अधिनियम सं ० 4) की धारा 6 (2) ।
5 [976 के अधिनियम सं ० 04 की धारा 69 द्वारा (-2-977 से) पूर्ववर्ती नियम के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
के अधीन उसी के द्वारा या उसके निदेश के अधीन लिया गया था या बनाया गया था, और वह वाद में उस प्रक्रम से अग्रसर हो सकेगा जिसमें उसे उसके पूर्ववर्ती ने छोड़ा था ।
(2) उपनियम (1) के उपबन्ध धारा 24 के अधीन अन्तरित वाद में लिए गए साक्ष्य को वहां तक लागू समझे जाएंगे जहां तक वे लायू किए जा सकते हैं ।
Source: India Code — The Code of Civil Procedure, 1908 (As on 10 Jan 2026). All CPC sections
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