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BSA Section 23 (Evidence Act 25, 26) — Confession to police officer
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) धारा 23 (पुरानी साक्ष्य अधिनियम 25, 26) — पुलिस के सामने स्वीकारोक्ति
| Law / कानून | Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 (BSA) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) |
|---|---|
| Section / धारा | 23 |
| Chapter / अध्याय | Chapter II — Relevancy Of Facts |
| Old law / पुरानी धारा | Indian Evidence Act, 1872 — Evidence Act 25, Evidence Act 26 |
| Punishment / सज़ा | — |
सरल हिंदी सार
पुलिस के सामने या पुलिस हिरासत में की गई स्वीकारोक्ति साबित नहीं की जा सकती (मजिस्ट्रेट के सामने को छोड़कर); बरामदगी वाला हिस्सा (पुरानी 27) परंतुक में।
मुख्य तत्व / Key ingredients
- पुलिस अधिकारी के सामने स्वीकारोक्ति अभियुक्त के विरुद्ध साबित नहीं
- पुलिस हिरासत में स्वीकारोक्ति — मजिस्ट्रेट के सामने हो तभी मान्य
- परंतुक: स्वीकारोक्ति से जो तथ्य बरामद हुआ, उतना भाग साबित हो सकता है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बीएसए धारा 23 क्या है? / What is BSA Section 23?
Confession to police officer — पुलिस के सामने स्वीकारोक्ति: पुलिस के सामने या पुलिस हिरासत में की गई स्वीकारोक्ति साबित नहीं की जा सकती (मजिस्ट्रेट के सामने को छोड़कर); बरामदगी वाला हिस्सा (पुरानी 27) परंतुक में।
बीएसए धारा 23 पुरानी साक्ष्य अधिनियम की कौन-सी धारा है? / Which old Evidence Act section is BSA Section 23?
BSA Section 23 = Evidence Act 25, 26. Confession to police officer
Full text (English)
(2) No confession made by any person while he is in the custody of a police officer, unless it is made in the immediate presence of a Magistrate shall be proved against him:
Provided that when any fact is deposed to as discovered in consequence of information received from a person accused of any offence, in the custody of a police officer, so much of such information, whether it amounts to a confession or not, as relates distinctly to the fact discovered, may be proved.
पूरा पाठ (हिंदी)
(2) कोई भी संस्वीकृति, जो किसी व्यक्ति ने उस समय की हो जब वह पुलिस अधिकारी की अभिरक्षा में है, उसके विरुद्ध तब तक साबित नहीं की जाएगी, जब तक कि वह मजिस्ट्रेट की साक्षात् उपस्थिति में न की गई हो :
परन्तु जब किसी तथ्य के बारे में यह अभिसाक्ष्य दिया जाता है कि किसी अपराध के अभियुक्त व्यक्ति से, जो पुलिस अधिकारी की अभिरक्षा में है, प्राप्त जानकारी के परिणामस्वरूप उसका पता चला है, तब ऐसी जानकारी में से, उतनी चाहे वह संस्वीकृति की कोटि में आती हो या नहीं, जितनी पता चले हुए तथ्य से स्पष्टतया संबंधित है, साबित की जा सकेगी ।
प्रमुख निर्णय / Landmark judgments
बरामदगी वाले नियम में केवल वही कथन मान्य जो खोजे गए तथ्य (वस्तु का स्थान और अभियुक्त की जानकारी) से सीधा जुड़ा हो।
Source: India Code — The Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 (As on 6 Oct 2025). All BSA sections
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